दो और भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत होंगे रवाना

दो और भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत होंगे रवाना

दो और भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत होंगे रवाना
Modified Date: March 23, 2026 / 03:12 pm IST
Published Date: March 23, 2026 3:12 pm IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर फारस की खाड़ी से आगे बढ़ना शुरू कर चुके हैं और युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ेंगे। जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत सोमवार दोपहर को ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र के पास थे। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं।

ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे। इसका कारण युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है।

जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से पता चला है कि ये दोनों जहाज सोमवार को किसी समय जलडमरूमध्य को पार कर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ सकते हैं।

इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है।

अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में बनाव बढ़ गया है। उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिन में, दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं।

एलपीजी ला रहा जहाज शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा। वहीं एक अन्य एलपीजी टैंकर नंदा देवी, अगले दिन गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों एलपीजी वाहक जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था।

संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल से लदा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग लाडकी 18 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा था। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश पहले ही सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार कर चुका है और तंजानिया के रास्ते में है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा था।

युद्ध क्षेत्र में बचे हुए 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से 22 जलडमरूमध्य के पश्चिमी भाग में हैं, जिनमें 611 नाविक सवार हैं, जबकि दो पूर्वी भाग में हैं।

पश्चिमी भाग में बचे हुए 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी वाहक हैं। इनमें से दो भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।

बाकी बचे जहाजों में से एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क यानी थोक सामान की ढुलाई करने वाले हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और तीन नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं।

कुल मिलाकर, लगभग 500 टैंकर जहाज फारस (अरब) की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे रहा है। कुछ जहाज लारक-क्वेशम चैनल के रास्ते जलडमरूमध्य से होकर गुजरे हैं।

उनका कहना है कि यह एक सत्यापन प्रक्रिया लगती है। इसके तहत ईरान यह पुष्टि करता है कि स्वामित्व, माल और जहाज अमेरिका के तो नहीं हैं या उन देशों के हैं जिन्हें ईरान ने पारगमन की अनुमति दी है।

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था। इन क्षेत्रों से आने वाले जहाज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं।

एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कटौती हुई है।

भाषा रमण अजय

अजय


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