(बिजय कुमार सिंह)
नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण देश के युवाओं में रोजगार और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। उनका कहना है कि युवाओं की चिंताओं को समझने और दूर करने के लिए सरकार और नीति-निर्माताओं को उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए।
कुमार ने पीटीआई-वीडियो के साथ साक्षात्कार में कहा कि देश का युवा एआई की वजह से अपने भविष्य को लेकर काफी असमंजस में है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर युवाओं के विरोध-प्रदर्शन संबंधी सवाल पर उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि इसके चलते रोजगार की क्षमता और नौकरियों के सृजन दोनों को लेकर आशंका पैदा हो रही है।
कुमार ने कहा कि हाल के आवधिक क्षमबल सर्वे (पीएलएफएस) के अनुसार, 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी की स्थिति चिंता का विषय है। इस आयु वर्ग में युवाओं की बेरोजगारी दर 20 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप उनकी स्थिति में होते, तो आप भी काफी परेशान होते। इसीलिए मैं चाहता हूं कि युवाओं के साथ बातचीत चलती रहे।’’
जून, 2026 के आंकड़ों के मुताबिक इस आयु वर्ग में महिलाओं की बेरोजगारी दर 20.7 प्रतिशत और पुरुषों की 14.6 प्रतिशत रही।
उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित कार्य बल के प्रमुख इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को भी युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें भविष्य को लेकर भरोसा दिलाना चाहिए।
पिछले महीने कॉक्रोच जनता पार्टी की अगुवाई में युवाओं के धरने-प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
एक अन्य सवाल पर कुमार ने कहा कि भारत को 2047 तक उच्च-मध्यम आय वाला देश बनने के लिए आठ प्रतिशत से अधिक, बल्कि दोहरे अंक यानी 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
कुमार के अनुसार, कई राज्यों ने पहले ही दोहरे अंक की वृद्धि दर हासिल कर यह साबित किया है कि यह संभव है। इसलिए प्रत्येक राज्य की जरूरत और क्षमता के अनुसार अलग-अलग विकास रणनीति बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ साल आप आठ प्रतिशत से कम की दर से बढ़ते हैं, तो कुछ वर्ष 10 प्रतिशत से अधिक की रफ्तार से। चीन ने दिखाया है कि आपकी पूरी अर्थव्यवस्था 30 बरस तक 10 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।’’
हाल में विश्व बैंक ने चार एशियाई देशों वियतनाम, फिलिपीन, श्रीलंका और जॉर्डन को निचले-मध्यम आय वाले से उच्च-मध्यम आय वाले देश के रूप में अद्यतन किया है।
उन्होंने कहा कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी लंबे समय से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 16–17 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। इसका एक बड़ा कारण कारोबार सुगमता की कमी और निजी क्षेत्र को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिलना है। उन्होंने चिंता जताई कि वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले तीन दशक से दो प्रतिशत से भी कम है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र केवल 10–11 प्रतिशत श्रमबल को ही रोजगार दे पा रहा है।
कुमार ने कहा कि भारत को केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजार को लक्ष्य बनाकर निर्यात बढ़ाना होगा। उन्होंने सभी राज्यों के लिए उनकी विशेषताओं के अनुरूप अलग-अलग निर्यात नीति बनाने की वकालत की। उनका मानना है कि निर्यात बढ़े बिना विनिर्माण का विस्तार और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव नहीं होगा।
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