भंडारण आधारित ई-कॉमर्स से हस्तशिल्प, ओडीओपी उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा : अधिकारी

Ads

भंडारण आधारित ई-कॉमर्स से हस्तशिल्प, ओडीओपी उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा : अधिकारी

  •  
  • Publish Date - August 2, 2026 / 10:26 AM IST,
    Updated On - August 2, 2026 / 10:26 AM IST

नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) सरकार द्वारा निर्यात के उद्देश्य से भंडारण (इन्वेंट्री) आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने के फैसले से हस्तशिल्प और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी के तहत आने वाले उत्पादों के निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा कि इस फैसले से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और हस्तशिल्प कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि नीति में बदलाव से पहले इस संबंध में व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया गया।

सरकार ने 23 जुलाई, 2026 को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में संशोधन करते हुए कहा था कि घरेलू स्तर पर निर्मित उत्पादों के निर्यात के मामले में ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री आधारित मॉडल पर लागू अंकुश प्रभावी नहीं होंगे। इस कदम का उद्देश्य भारतीय विक्रेताओं को वैश्विक बाजारों तक आसान और व्यापक पहुंच उपलब्ध कराकर निर्यात को बढ़ावा देना है।

नीति में इस बदलाव के बाद विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां अब केवल निर्यात के लिए माल का भंडारण कर सकेंगी। इससे पहले नीति में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाला उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े मामलों को देखता है। यह निर्णय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा।

अधिकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव को सबसे पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने ई-कॉमर्स के माध्यम से भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रखा था। ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने भी लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग की थी। डीजीएफटी इस संबंध में जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।

सरकार ई-कॉमर्स के जरिये निर्यात बढ़ाने के लिए अन्य उपायों पर भी काम कर रही है। इसके तहत ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है।

‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल के तहत देश के 773 जिलों में अब तक 1,244 उत्पादों की पहचान की जा चुकी है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना और उन्हें घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है।

अनुमानों के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स निर्यात फिलहाल लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर का है, जबकि चीन का ई-कॉमर्स निर्यात करीब 350 अरब अमेरिकी डॉलर है। वैश्विक ई-कॉमर्स व्यापार का आकार वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर आंका गया है, जिसके 2030 तक बढ़कर 2,000 अरब डॉलर डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

भाषा अजय अजय

अजय