यूनिस्टोन कैपिटल व उसके निदेशक ने 67 लाख रुपये देकर सेबी के साथ भेदिया कारोबार उल्लंघन मामले का किया निपटारा

यूनिस्टोन कैपिटल व उसके निदेशक ने 67 लाख रुपये देकर सेबी के साथ भेदिया कारोबार उल्लंघन मामले का किया निपटारा

यूनिस्टोन कैपिटल व उसके निदेशक ने 67 लाख रुपये देकर सेबी के साथ भेदिया कारोबार उल्लंघन मामले का किया निपटारा
Modified Date: June 17, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: June 17, 2026 12:53 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) मर्चेंट बैंकर यूनिस्टोन कैपिटल और उसके निदेशक जितेंद्र संघवी ने 67 लाख रुपये से अधिक की संयुक्त राशि का भुगतान कर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ भेदिया कारोबार नियमों के कथित उल्लंघन के मामले का निपटारा कर लिया है।

सेबी ने यूनिस्टोन और संघवी के खिलाफ क्यूपिड लिमिटेड के शेयर में भेदिया कारोबार निषेध (पीआईटी) नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर अधिनिर्णय कार्यवाही शुरू की थी।

सेबी के अनुसार, आवेदकों (यूनिस्टोन और संघवी) ने कथित रूप से क्यूपिड लिमिटेड के शेयर में छह महीने की अवधि के भीतर खरीद और बिक्री के सौदे (कॉन्ट्रा ट्रेड) किए।

बाजार नियामक ने कहा कि जांच अवधि के दौरान उन्होंने आवश्यक पूर्व-अनुमोदन प्राप्त किए बिना कंपनी के शेयरों में लेनदेन भी किया।

इसके बाद नियामक ने 13 जून, 2025 को कथित उल्लंघनों के लिए आवेदकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया।

अधिनिर्णय कार्यवाही लंबित रहने के दौरान यूनिस्टोन और संघवी ने जुलाई 2025 में अलग-अलग समझौता आवेदन दायर किए, ताकि मामले का निपटारा ‘‘तथ्यों और कानून संबंधी निष्कर्षों को स्वीकार या अस्वीकार किए बिना’’ किया जा सके।

उच्च स्तरीय सलाहकार समिति ने यूनिस्टोन कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 34.84 लाख रुपये और संघवी द्वारा 32.50 लाख रुपये के भुगतान पर मामले के निपटारे की सिफारिश की।

इस सिफारिश को बाद में सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों की समिति ने मंजूरी दे दी। यह ध्यान में रखते हुए कि समझौता राशि दो जून 2026 को जमा कर दी गई, नियामक ने समझौता आदेश के जरिये अधिनिर्णय कार्यवाही समाप्त कर दी।

सेबी ने कहा, ‘‘ समझौता शर्तों को स्वीकार किए जाने और राशि प्राप्त होने के बाद 13 जून, 2025 के कारण बताओ नोटिस के तहत शुरू की गई अधिनिर्णय कार्यवाही को निपटाया जाता है।’’

नियामक ने स्पष्ट किया कि यदि बाद में यह पाया जाता है कि पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई या किसी भी आश्वासन का उल्लंघन हुआ है, तो वह कार्यवाही शुरू करने या पुनः बहाल करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

भाषा निहारिका

निहारिका


लेखक के बारे में