UPI Payment Charges News Latest Update: अब UPI से 50000 रुपए ट्रांसफर करने पर भी नहीं लगेगा चार्ज! मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जानिए क्या है फंडा / Image: AI Generated
नई दिल्ली: UPI Payment Charges News Latest Update नए यूपीआई फ्रेमवर्क का पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूपीआई सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा, चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान, साथ ही छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाले लेन-देन भी निःशुल्क रहेंगे। इसके चलते, लगभग 96% पी2एम लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। एमडीआर केवल ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा।
UPI Payment Charges News Latest Update यह स्पष्ट किया जाता है कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या एनपीसीआई की ओर से वसूला जाने वाला कोई शुल्क है। यह यूपीआई इकोसिस्टम के संचालन और निरंतर विस्तार में सहयोग के लिए बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है। भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत यूपीआई संचालन समिति की ओर से विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात पेश किया गया यह फ्रेमवर्क यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्कों से बचाने का प्रयास करता है।
सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन: सभी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) यूपीआई लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे, चाहे ट्रांसफर की गई राशि कितनी भी हो। यूपीआई के माध्यम से पैसा भेजने या प्राप्त करने के लिए लोगों पर कोई लेन-देन शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क या अन्य शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसलिए, कुल लेन-देन मूल्य के 70% के बराबर यूपीआई लेन-देन एमडीआर फ्रेमवर्क से पूरी तरह बाहर रहेंगे। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान: ₹2,000 तक के सभी पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई के माध्यम से ऐसे भुगतान करते समय ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।
पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) श्रेणी के अंतर्गत यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स सहित छोटे व्यापारियों को सभी लेन-देनों पर शून्य एमडीआर का लाभ मिलता रहेगा। यह प्रावधान स्ट्रीट वेंडर्स, मोहल्ले की दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाएगा।
₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेन-देन: ₹2,000 से अधिक के पी2एम लेन-देन पर ही 0.4% का मामूली एमडीआर लागू होगा। यह एमडीआर बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान प्रणाली के सभी प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। मूलभूत क्षेत्रों में लेन-देन: रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम लाभ वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन ₹5 का एकसमान एमडीआर लागू होगा। यह एकसमान शुल्क महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम लाभ पर चलने वाले कारोबार के लिए लागत निश्चितता प्रदान करेगा।
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों से संबंधित भुगतानों पर 0.02% एमडीआर लागू होगा, जो प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित है। यह घटी हुई दर औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा निवेशकों की निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
एमडीआर व्यापारी भुगतान प्रणाली के अंतर्गत लगने वाला एक शुल्क है। यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर न डालें। यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं को प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। लोगों को असीमित मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा मिलती रहेगी, जिसमें कोई मासिक कोटा, मात्रा प्रतिबंध या मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई सीमा नहीं होगी। बैंकों और एनपीसीआई की ओर से निर्धारित दैनिक लेन-देन सीमाएं, जो आमतौर पर लेनदेन की श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक होती हैं, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के लिए हैं। ये शुल्क लगाने की सीमाएं नहीं हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एमडीआर केवल लगभग 4% व्यापारिक लेन-देन पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि लगभग 96% व्यापारिक लेन-देन अप्रभावित रहेंगे, क्योंकि वे या तो ₹2,000 की सीमा से कम हैं या छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं। इसलिए यह फ्रेमवर्क लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों की रक्षा करता है, जबकि बड़े व्यापारी लेन-देन पर सीमित शुल्क लागू करता है।
छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई को प्रोत्साहन देने के लिए एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा। कुल एमडीआर संग्रह के 5% के बराबर राशि इस कोष में जमा की जाएगी। यह कोष यूपीआई की व्यापक स्वीकृति, निरंतर इस्तेमाल और भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में छोटे व्यवसायों को शामिल करने में सहयोग करेगा।
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत लागू दरों, परिचालन व्यवस्थाओं और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर यूपीआई संचालन समिति की ओर से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया है। इस रूपरेखा का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करना है, साथ ही लोगों के लिए भुगतान को निःशुल्क बनाए रखना और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा करना है। बड़े व्यापारी लेन-देन से प्राप्त राजस्व बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों सहित भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और सुधार में मदद करेगा। यह फ्रेमवर्क वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट में दी गई सिफारिश के अनुरूप भी है, जिसमें एक व्यवहार्य राजस्व के महत्व पर जोर दिया गया था।