कोयला गैसीकरण से बना यूरिया आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगा : अधिकारी

कोयला गैसीकरण से बना यूरिया आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगा : अधिकारी

कोयला गैसीकरण से बना यूरिया आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगा : अधिकारी
Modified Date: June 11, 2026 / 07:03 pm IST
Published Date: June 11, 2026 7:03 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने पर कोयला गैसीकरण से यूरिया बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा और इससे आयातित यूरिया और अमोनिया का एक घरेलू विकल्प मिलेगा। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी है।

अशोक यूनिवर्सिटी के ‘अशोक सेंटर फॉर ए पीपल सेंट्रिक एनर्जी ट्रांजिशन’ (एसीपीईटी) और ‘चिंतन रिसर्च फाउंडेशन’ (सीआरएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है और यूरिया उर्वरक का एक अहम हिस्सा है। यह उर्वरक श्रृंखला में बहुत ज्यादा मूल्य जोड़ता है और अभी हम यूरिया और अमोनिया का आयात करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यह पूरी तरह से घरेलू उत्पादन होगा। इससे एक तो उपलब्धता सुनिश्चित होगी और दूसरी बात यह है कि हमें इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे ये परियोजना बड़ी होंगी और सरकार जिस तरह की सब्सिडी और समर्थन दे रही है, उसे देखते हुए ये फायदेमंद साबित होंगे।’’

बरार ने भारतीय हालात के हिसाब से गैसीकरण प्रौद्योगिकी को देश में ही विकसित करने की भी बात कही।

कोल गैसीकरण पर आधारित यूरिया बनाने की प्रक्रिया में कच्चे कोयले और पेट कोक को अधिक-तापमान ऑक्सिडेशन के जरिये सिनगैस (हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड) में बदला जाता है। इस हाइड्रोजन को हवा से मिलने वाली नाइट्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है और फिर इसकी कार्बन डाइऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया कराकर यूरिया तैयार किया जाता है। यह फीडस्टॉक के तौर पर प्राकृतिक गैस की जगह लेता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है।

सरकार यूरिया बनाने के लिए फीडस्टॉक के अलग-अलग स्रोतों इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है ताकि आयात की गई प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम हो सके और साफ-सुथरी गैसीकरण प्रौद्योगिकी के जरिये भारत के बड़े घरेलू कोयला भंडार का फायदा उठाया जा सके।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय यह पक्का करने के लिए तैयार है कि मानसून के दौरान कोयले की कोई कमी न हो। उन्होंने कहा, ‘‘कोयला मंत्रालय पूरी तरह से स्थिति पर नजर रखे हुए है और अब तक ऐसा कोई दिन नहीं आया जब कोयले का स्टॉक 22-23 दिन से कम रहा हो।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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