अमेरिका का एआई निर्यात नियंत्रण का फैसला भारत के लिए सबक,प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनें:करंदीकर
अमेरिका का एआई निर्यात नियंत्रण का फैसला भारत के लिए सबक,प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनें:करंदीकर
(बिजय कुमार सिंह)
नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की कंपनी एंथ्रोपिक के अमेरिकी सरकार के नए निर्यात नियंत्रण नियमों का पालन करने के लिए अपने नवीनतम एआई मॉडल ‘ऑफलाइन’ करने के फैसले से यह स्पष्ट है कि भारत को प्रौद्योगिकी विकास में आत्मनिर्भर बनना होगा।
एंथ्रोपिक ने पिछले सप्ताह बताया था कि उसने अपने नवीनतम कृत्रिम मेधा मॉडल ‘फेबल 5’ और ‘माइथोस 5’ को ऑफलाइन कर दिया है, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीत प्रशासन के इन मॉडलों के विदेशी नागरिकों द्वारा उपयोग को रोकने संबंधी निर्देश का पालन हो सके।
करंदीकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ स्थानीय एआई अवसंरचना और हार्डवेयर के विकास में हम शायद पीछे हैं… एंथ्रोपिक का यह फैसला इस बात को और मजबूत करता है कि भारत को प्रौद्योगिकी विकास में आत्मनिर्भर बनना होगा।’’
यह निर्यात नियंत्रण अमेरिकी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य उन्नत एआई मॉडलों तक पहुंच को सीमित करना है।
एंथ्रोपिक ने पिछले सप्ताह ‘फेबल’ का एक सीमित संस्करण जारी किया था, जो उसके अधिक उन्नत मॉडल ‘माइथोस’ का हल्का संस्करण है। साइबर सुरक्षा चिंताओं के कारण ‘माइथोस’ तक पहुंच को कंपनी ने काफी सीमित रखा है।
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि भारत को स्थानीय एआई अवसंरचना और हार्डवेयर के विकास के लिए और प्रयास करने होंगे, क्योंकि ‘‘ हमारे पास सेमीकंडक्टर चिप या प्लेटफॉर्म नहीं हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत बड़े पैमाने पर एआई अवसंरचना लागू करने की क्षमता है।
करंदीकर ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित अनुप्रयोग विकसित कर रही है।
उन्होंने साथ ही बताया कि आयोग नागरिक-केंद्रित सेवाओं में एआई के उपयोग के लिए नए तरीके तलाश रहा है और भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने में बढ़त बनाई है।
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत कम से कम 12 स्टार्टअप को समर्थन दिया गया है, जो मूलभूत एआई मॉडल विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले एक वर्ष में एआई मिशन ने कई कार्य किए हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी की तेज रफ्तार को देखते हुए और प्रयास करने की जरूरत है।’’
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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