अमेरिका का भारत पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाना बंधुआ मजदूरी मुद्दे का समाधान नहींः जीटीआरआई

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अमेरिका का भारत पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाना बंधुआ मजदूरी मुद्दे का समाधान नहींः जीटीआरआई

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 07:33 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) अमेरिका में भारत समेत कई देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का उद्देश्य कथित बंधुआ मजदूरी मुद्दे का समाधान करना न होकर ट्रंप प्रशासन के शुल्क रवैये को कायम रखना लग रहा है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह अनुमान जताया।

अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आयातित उत्पादों पर बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े आरोपों के तहत यह 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जो 24 जुलाई से प्रभावी भी हो गया है।

‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इस शुल्क के पीछे कोई ठोस तथ्यात्मक आधार नहीं है और अमेरिका ने यह साबित नहीं किया है कि भारत बंधुआ मजदूरी से विनिर्मित उत्पादों का आयात करता है।

उन्होंने कहा कि भारत पहले ही अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से विनिर्मित उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा चुका है और देश के घरेलू कानून भी इस तरह के श्रम को प्रतिबंधित करते हैं।

यह नया शुल्क फरवरी में 150 दिनों के लिए वैश्विक स्तर पर लगाए गए अस्थायी 10 प्रतिशत शुल्क की जगह आया है। हालांकि 24 जुलाई से पहले रवाना और 28 जुलाई तक अमेरिका पहुंचने वाले सामान को इस शुल्क से छूट दी गई है।

जीटीआरआई ने कहा कि नए शुल्क से कच्चे माल, कृषि कच्चा माल, कुछ औद्योगिक उत्पाद, चिकित्सा आपूर्ति और धातु उत्पादों को छूट दी गई है जबकि इस्पात, एल्युमीनियम और वाहन कलपुर्जे जैसे धारा 232 के तहत आने वाले उत्पाद पहले से ही उच्च शुल्क के दायरे में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लगभग 70 प्रतिशत निर्यात अब इस 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आएंगे, जो सर्वाधिक तरजीही देश (एमएफएन) के लिए लागू शुल्क के ऊपर लागू होगा। इनमें इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, रसायन, मशीनरी, प्लास्टिक, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण और फर्नीचर शामिल हैं।

श्रीवास्तव ने आगाह किया कि अमेरिका की एक अन्य जांच का निष्कर्ष आने के बाद औद्योगिक उत्पादों पर नए अतिरिक्त शुल्क लगाए जा सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यात पर और दबाव बढ़ सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

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