(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, 30 जून (भाषा) भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और बातचीत का केवल अंतिम एक प्रतिशत हिस्सा ही बाकी है।
उन्होंने भरोसा जताया कि समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेगा।
‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट’ को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि वह इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि यह दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।
उन्होंने बताया कि करीब 18 महीने की वार्ता के बाद यह अब अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस समझौते के अंतिम चरण में हैं। इसका अधिकतर हिस्सा पूरा हो चुका है। दोनों पक्षों की ओर से कुछ मुद्दे अभी बाकी हैं। बातचीत का केवल अंतिम एक प्रतिशत हिस्सा शेष है।’’
भारत में अमेरिकी राजदूत ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख जताते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच व्यक्तिगत तालमेल दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग पूछते हैं कि इसमें इतना समय क्यों लग रहा है? हम पिछले डेढ़ साल से इस पर काम कर रहे हैं। तुलना करें तो यूरोप के साथ व्यापार समझौते में 20 वर्ष लगे थे। इसलिए जब तक हम यूरोपीय समझौते से पहले इसे पूरा कर लेते हैं, तब तक हम अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि मैं इसे जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।’’
गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत यात्रा की बेहद सुखद यादें संजो रखी हैं और वह आज भी उसका जिक्र करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उनकी पिछली भारत यात्रा सबसे यादगार यात्राओं में से एक थी, जिसका वह आज भी जिक्र करते हैं। यह यात्रा उनके दिल के बेहद करीब रही है। मैं राष्ट्रपति का दोबारा भारत दौरा होने का इंतजार कर रहा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो दशकों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर हो गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है और अब हम इसे इससे भी कहीं ऊंचे स्तर पर ले जाएंगे।’’
राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अगले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य की घोषणा का भी उन्होंने उल्लेख किया।
राजदूत ने साथ ही घोषणा की कि क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक लगभग दो सप्ताह बाद फिलीपीन में होने वाली है।
‘क्वाड’ (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक समूह है।
भाषा निहारिका वैभव
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