अमेरिकी न्यायाधीश ने गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया

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अमेरिकी न्यायाधीश ने गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 01:31 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 01:31 PM IST

न्यूयॉर्क/नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) अमेरिका की एक अदालत ने अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यह मुकदमा बिना सुनवाई के समाप्त हो गया।

न्यूयॉर्क के ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट’ ने न्याय विभाग के नियम 48(ए) के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए आरोपपत्र में शामिल दूसरे, तीसरे और चौथे आरोपों को खारिज कर दिया। इसका अर्थ है कि इन आरोपों को दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता। इन आरोपों में प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप शामिल थे।

वायर धोखाधड़ी की साजिश एक संघीय अपराध है जिसमें दो या उससे अधिक लोग धोखा देने के मकसद से, इंटरनेट, ईमेल या फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार का इस्तेमाल करके दूसरों के पैसे या संपत्ति हड़पने की साजिश करते हैं।

अदालत ने प्रथम आरोप, यानी विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (एफसीपीए) के कथित उल्लंघन और पांचवां आरोप, यानी न्याय में बाधा डालने की साजिश पर फैसला सुरक्षित रखा है। ये आरोप अदालत में पेश नहीं हुए सह-आरोपियों से संबंधित हैं। सरकार को इन मामलों में नियम 48(ए) के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम अदाणी ने कहा, ‘‘सत्य की जीत हुई।’’

उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया और कार्यवाही के दौरान (अदाणी) समूह के साथ खड़े रहने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने राष्ट्र निर्माण और दीर्घकालिक ‘वैल्यू’ सृजन के प्रति समूह की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

नवंबर 2024 में सार्वजनिक किए गए आरोपपत्र में आरोप लगाया गया था कि अदाणी समूह के अधिकारियों ने सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश रची थी। इन ठेकों से दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का मुनाफा होने का अनुमान था। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि करीब चार अरब अमेरिकी डॉलर का वित्तपोषण जुटाने में मदद करने वाले निवेशकों को गुमराह किया गया तथा अन्य आरोपियों ने साक्ष्य नष्ट किए और संघीय जांचकर्ताओं से झूठ बोला।

अदाणी समूह ने इन आपराधिक आरोपों से लगातार इनकार किया है। समूह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उसने सभी लागू कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन किया है।

अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) की अलग कार्रवाई भी गौतम अदाणी के खिलाफ अंतिम आदेश के साथ समाप्त हो गई है। इसके तहत उन्होंने आरोप स्वीकार किए बिना स्थायी निषेधाज्ञा पर सहमति जताई है।

न्याय विभाग ने यह भी कहा कि नवंबर 2024 में तत्कालीन बाइडन प्रशासन के अंतिम दिनों में सार्वजनिक किए गए अभियोग के मुकदमे तक पहुंचने की वास्तविक संभावना बहुत कम थी और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित ‘‘बदनाम करने की कवायद’’ प्रतीत होता था।

न्यायाधीश गैरॉफिस ने कहा कि वह इस बात से आश्वस्त हैं कि मामले को खारिज करने के न्याय विभाग के फैसले में अमेरिका में 10 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की गौतम अदाणी की सार्वजनिक घोषणा पर विचार नहीं किया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि संघीय अभियोजकों द्वारा मामला वापस लेने के फैसले की समीक्षा में अदालत की भूमिका सीमित होती है।

गौतम अदाणी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘इस चुनौतीपूर्ण दौर में सत्य, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा विश्वास कभी नहीं डिगा। मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने हम पर, व्यवस्था पर और भारत की न्याय व्यवस्था की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। हम अपने देश के निर्माण, दीर्घकालिक वैल्यू सृजित करने और स्वयं से बड़े उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करते रहेंगे। यही हमारी प्रतिबद्धता है।’’

याचिका स्वीकार करने से पहले न्यायाधीश गैरॉफिस ने न्याय विभाग को सार्वजनिक रूप से मामला वापस लेने के कारण बताने का निर्देश दिया था। साथ ही आरोपियों से शपथपत्र दाखिल कर यह पुष्टि करने को कहा था कि इस फैसले के बदले किसी प्रकार का कोई वादा, प्रस्ताव, लेन-देन या कोई गोपनीय समझौता नहीं हुआ।

न्यायाधीश गैरॉफिस ने न्याय विभाग के नियम 48(ए) के तहत दायर याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वनीत जैन के खिलाफ आरोपपत्र में शामिल दूसरे, तीसरे और चौथे आरोपों को इस प्रावधान के साथ खारिज कर दिया कि इन्हें दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता। इन धाराओं में प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप थे।

उन्होंने बाकी आरोपों पर फैसला सुरक्षित रखा। ये आरोप पांच ऐसे सह-आरोपियों के खिलाफ हैं, जो अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इनके नाम रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रुपेश अग्रवाल हैं।

न्याय विभाग को इन दोनों आरोपों (पहले और पांचवें) के संबंध में अदालत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। अदालत में पेश नहीं हुए सह-आरोपियों के वकीलों को भी उसी तारीख तक अपने मुवक्किलों की सहमति की पुष्टि करनी होगी।

न्यायाधीश गैरॉफिस ने स्पष्ट किया कि यह अभियोजन पक्ष के विवेकाधिकार का परिणाम है, मामले के गुण-दोष पर फैसला नहीं।

उन्होंने कहा कि दूसरे, तीसरे और चौथे आरोपों को खारिज करने के लिए नियम 48(ए) के तहत न्याय विभाग की याचिका मंजूर किए जाने को विभाग के फैसले के साथ अदालत की सहमति या मामले के गुण-दोष पर किसी राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले में कोई मुकदमा नहीं चला, किसी गवाह ने गवाही नहीं दी और किसी साक्ष्य की अदालत में पड़ताल नहीं हुई।

भाषा योगेश सुभाष

सुभाष