अमेरिकी न्यायाधीश ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया

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अमेरिकी न्यायाधीश ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 10:55 AM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 10:55 AM IST

न्यूयॉर्क/नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) अमेरिका की एक अदालत ने अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप स्थायी रूप से खारिज कर दिए हैं, जिससे कथित धोखाधड़ी और रिश्वत के मामले में करीब दो साल से जारी कानूनी कार्यवाही अब समाप्त हो गई है।

न्यूयॉर्क के ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट’ ने न्याय विभाग के नियम 48(ए) के तहत दायर उस याचिका को मंजूरी दे दी, जिसमें गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वनीत जैन के खिलाफ आरोपपत्र को खारिज करने का अनुरोध किया गया था।

न्यायाधीश निकोलस गैरॉफिस ने अभियोजन पक्ष से मामले को वापस लेने के फैसले पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगने के बाद न्याय विभाग की याचिका को मंजूरी दी। आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने का अर्थ है कि आपराधिक कार्यवाही हमेशा के लिए समाप्त हो गई है और इन आरोपों को दोबारा दायर नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों की सत्यता या आधार पर कोई न्यायिक निष्कर्ष दिया है।

यह आपराधिक मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी, सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के पूर्व सीईओ वनीत जैन और अन्य लोग भारत के सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश में शामिल थे। आरोप था कि इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा परियोजनाओं के ऐसे ठेके हासिल करना था, जिनसे दो दशकों में दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का कर-पश्चात लाभ होने का अनुमान था।

अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि अमेरिकी बाजार में ऋण और बॉन्ड जारी कर तीन अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाने के दौरान निवेशकों को गुमराह किया गया।

अदाणी समूह ने लगातार इन आपराधिक आरोपों से इनकार किया था। समूह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि उसने सभी लागू कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करते हुए काम किया है।

अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) की अलग कार्रवाई भी गौतम अदाणी के खिलाफ अंतिम आदेश के साथ समाप्त हो गई है। इसके तहत उन्होंने आरोप स्वीकार किए बिना आदेश से सहमति जताई है। अंतिम आदेश के अनुसार उन्हें 30 दिन के भीतर एसईसी को 60 लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना अदा करना होगा।

अदालत में ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाना अब न्यायहित में नहीं है। उसने अधिकार क्षेत्र और साक्ष्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों, कथित घटनाओं के मुख्य रूप से भारत से जुड़े होने, भारतीय अधिकारियों द्वारा मामले की जांच किए जाने, निवेशकों को किसी स्पष्ट नुकसान का पता नहीं चलने तथा व्यापक जनहित जैसे कारणों का हवाला दिया।

न्याय विभाग ने यह भी कहा कि नवंबर, 2024 में तत्कालीन बाइडन प्रशासन के अंतिम दिनों में सार्वजनिक किए गए अभियोग के मुकदमे तक पहुंचने की वास्तविक संभावना बहुत कम थी और यह राजनीतिक उद्देश्य से चलाया गया बदनाम करने का प्रयास प्रतीत होता है।

न्यायाधीश गैरॉफिस ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि नवंबर, 2024 में अमेरिका में 10 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की गौतम अदाणी की घोषणा का न्याय विभाग के फैसले से कोई संबंध नहीं था।

उन्होंने यह भी कहा कि संघीय अभियोजकों द्वारा मामला वापस लेने के फैसले की समीक्षा में अदालत की भूमिका सीमित होती है।

गौतम अदाणी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने इसे विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘इस चुनौतीपूर्ण दौर में सत्य, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा विश्वास कभी नहीं डिगा। मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने हम पर, व्यवस्था पर और भारत की न्याय व्यवस्था की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। हम अपने देश के निर्माण, दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने और स्वयं से बड़े उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करते रहेंगे। यही हमारी प्रतिबद्धता है।’’

याचिका स्वीकार करने से पहले न्यायाधीश गैरॉफिस ने न्याय विभाग को सार्वजनिक रूप से मामला वापस लेने के कारण बताने का निर्देश दिया था। साथ ही आरोपियों से शपथपत्र दाखिल कर यह पुष्टि करने को कहा था कि इस फैसले के बदले किसी प्रकार का कोई वादा, प्रस्ताव, लेन-देन या कोई गोपनीय समझौता नहीं हुआ।

अपने शपथपत्र में गौतम अदाणी ने न्याय विभाग के फैसले से जुड़े किसी भी वादे, प्रस्ताव, लेन-देन या गोपनीय समझौते के अस्तित्व से स्पष्ट इनकार किया। सरकार की दलीलों और शपथपत्रों की समीक्षा के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार कर मामला स्थायी रूप से खारिज कर दिया।

मामला खारिज होने का अर्थ है कि आपराधिक कार्यवाही मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई। न तो किसी गवाह से जिरह हुई, न अदालत में साक्ष्यों की जांच हुई और न ही मूल आपराधिक आरोपों पर कोई न्यायिक निष्कर्ष दिया गया।

यह पूरा घटनाक्रम जनवरी, 2023 में अब बंद हो चुकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह पर बढ़ी वैश्विक निगरानी की पृष्ठभूमि में सामने आया। उस रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी और एक समय उनका बाजार पूंजीकरण 150 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक घट गया था।

अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग के आरोपों को भी लगातार खारिज किया है और कहा है कि उसने सभी लागू कानूनों और प्रकटीकरण संबंधी नियमों का पालन किया है।

भाषा योगेश धीरज

धीरज