Vegetable Oil Import Duty Cut: दिवाली से पहले आई राहत भरी खबर! घट सकते हैं खाने के तेल के दाम, सरकार उठा सकती है ये बड़ा कदम

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Vegetable Oil Import Duty Cut: सरकार वेजिटेबल ऑयल पर आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। फैसला होने पर विदेशी तेल सस्ता हो सकता है। जिससे घरेलू बाजार में कीमतें घटने की संभावना है। ऐसे में त्योहारों के सीजन से पहले लोगों को खाने के तेल कीमतों में राहत मिल सकती है।

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 03:17 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 03:19 PM IST

(Vegetable Oil Import Duty Cut/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • सरकार खाद्य तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है।
  • ड्यूटी कम होने से तेल की कीमत घट सकती है।
  • भारत अपनी जरूरत का करीब दो-तिहाई तेल आयात करता है।

नई दिल्ली: Vegetable Oil Import Duty Cut: देश में खाने-पीने की चीजों की बढ़ते दामों के बीच सरकार आम लोगों को राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकार खाने के तेल यानी वेजिटेबल ऑयल पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी कम (Vegetable Oil Import Duty Cut) करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लिया जाता है तो विदेशों से आने वाला तेल सस्ता हो सकता है और इसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इससे सितंबर से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारों के दौरान लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार महंगाई पर दबाव कम करने के लिए इस विकल्प पर विचार कर रही है।

भारत बड़ी मात्रा में करता है तेल का आयात

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का करीब दो-तिहाई खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है। भारत में मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का आयात (Vegetable Oil Import Duty Cut) किया जाता है। ये तेल मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से भारत पहुंचते हैं। आयात पर लगने वाला शुल्क कम होने से इन तेलों की लागत घट सकती है। इसका फायदा कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी मिल सकता है।

एक साल में करीब 20% बढ़ी कीमत

पिछले एक साल के दौरान भारत में वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है। अब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इसलिए खाद्य तेल की मांग बढ़ने की संभावना है। इस दौरान घरों और दुकानों में मिठाई, नमकीन और कई तरह के तले हुए पकवान ज्यादा बनाए जाते हैं। मांग बढ़ने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के जरिए बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने का विकल्प देख रही है।

ड्यूटी में 5% कटौती का प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में करीब 5 फीसदी की कटौती (Vegetable Oil Import Duty Cut) पर विचार कर सकती है। लेकिन सरकार किसानों के हितों को भी ध्यान में रखना चाहती है। ड्यूटी घटाने का मकसद ऐसा संतुलन बनाना है, जिससे घरेलू सोयाबीन की कीमत न्यूनतम समर्थन स्तर से नीचे न जाए और तिलहन किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। वहीं, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में मांग बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और सोयाबीन तेल की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में केवल इंपोर्ट ड्यूटी कम करना ही कीमतों पर नियंत्रण का सही उपाय साबित होगा या नहीं यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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सरकार इंपोर्ट ड्यूटी क्यों घटाना चाहती है?

खाने के तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और त्योहारों से पहले आम लोगों को राहत देने के लिए।

इंपोर्ट ड्यूटी घटने से क्या होगा?

विदेशों से आने वाले खाद्य तेल की लागत कम हो सकती है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें घटने की संभावना है।

भारत कितना खाद्य तेल आयात करता है?

भारत अपनी कुल खाद्य, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का आयात करता तेल जरूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा विदेशों से खरीदता है।

किन तेलों का ज्यादा आयात होता है?

भारत मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का आयात करता है।