(Vegetable Oil Import Duty Cut/ Image Credit: IBC24 News)
नई दिल्ली: Vegetable Oil Import Duty Cut: देश में खाने-पीने की चीजों की बढ़ते दामों के बीच सरकार आम लोगों को राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकार खाने के तेल यानी वेजिटेबल ऑयल पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी कम (Vegetable Oil Import Duty Cut) करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लिया जाता है तो विदेशों से आने वाला तेल सस्ता हो सकता है और इसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इससे सितंबर से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारों के दौरान लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार महंगाई पर दबाव कम करने के लिए इस विकल्प पर विचार कर रही है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का करीब दो-तिहाई खाद्य तेल विदेशों से खरीदता है। भारत में मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का आयात (Vegetable Oil Import Duty Cut) किया जाता है। ये तेल मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से भारत पहुंचते हैं। आयात पर लगने वाला शुल्क कम होने से इन तेलों की लागत घट सकती है। इसका फायदा कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी मिल सकता है।
पिछले एक साल के दौरान भारत में वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है। अब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इसलिए खाद्य तेल की मांग बढ़ने की संभावना है। इस दौरान घरों और दुकानों में मिठाई, नमकीन और कई तरह के तले हुए पकवान ज्यादा बनाए जाते हैं। मांग बढ़ने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के जरिए बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने का विकल्प देख रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में करीब 5 फीसदी की कटौती (Vegetable Oil Import Duty Cut) पर विचार कर सकती है। लेकिन सरकार किसानों के हितों को भी ध्यान में रखना चाहती है। ड्यूटी घटाने का मकसद ऐसा संतुलन बनाना है, जिससे घरेलू सोयाबीन की कीमत न्यूनतम समर्थन स्तर से नीचे न जाए और तिलहन किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। वहीं, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में मांग बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और सोयाबीन तेल की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में केवल इंपोर्ट ड्यूटी कम करना ही कीमतों पर नियंत्रण का सही उपाय साबित होगा या नहीं यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।