थोक महंगाई दिसंबर में आठ महीने के उच्च स्तर 0.83 प्रतिशत पर

थोक महंगाई दिसंबर में आठ महीने के उच्च स्तर 0.83 प्रतिशत पर

थोक महंगाई दिसंबर में आठ महीने के उच्च स्तर 0.83 प्रतिशत पर
Modified Date: January 14, 2026 / 06:16 pm IST
Published Date: January 14, 2026 6:16 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने वृद्धि जारी रही और दिसंबर 2025 में यह आठ महीने के उच्च स्तर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी से इसमें वृद्धि दर्ज की गई। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में शून्य से नीचे 0.32 प्रतिशत और अक्टूबर में शून्य से नीचे 1.02 प्रतिशत रही थी। दिसंबर 2024 में थोक मुद्रास्फीति 2.57 प्रतिशत थी।

उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘मुद्रास्फीति बीते महीने मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, खनिजों, मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण, खाद्य उत्पादों के निर्माण और वस्त्र आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी।’’

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डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतें 0.43 प्रतिशत कम हुईं जबकि नवंबर में यह दर 4.16 प्रतिशत थी। सब्जियों की महंगाई दर में दिसंबर में 3.50 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि नवंबर में यह 20.23 प्रतिशत थी।

वित्तीय परामर्श कपंनी बार्कलेज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि दिसंबर में खाद्य पदार्थों में महंगाई में कम दर से कमी एवं विनिर्माण उत्पादों में बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें थोक मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि जारी रहने का अनुमान है।’’

विनिर्मित उत्पादों के मामले में मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के 1.33 प्रतिशत के मुकाबले दिसंबर में 1.82 प्रतिशत रही।

गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी की मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.95 प्रतिशत रही जबकि नवंबर में यह 2.27 प्रतिशत थी।

ईंधन तथा बिजली क्षेत्रों में महंगाई दर में गिरावट जारी रही और यह 2.31 प्रतिशत रही जबकि नवंबर में यह 2.27 प्रतिशत थी।

रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि प्रतिकूल आधार के कारण खाद्य मुद्रास्फीति में सालाना आधार पर वृद्धि, वैश्विक जिंस कीमतों में वृद्धि और पिछले कुछ महीनों से रुपये में गिरावट से इक्रा को जनवरी में थोक मुद्रास्फीति के बढ़कर 1.5 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है जो पिछले 10 महीनों में सार्वधिक होगा।

इसी सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, सब्जी, अंडा और दाल समेत रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई। नवंबर में मुद्रास्फीति 0.71 प्रतिशत थी।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति समीक्षा करते समय समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर नजर रखता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में अभी तक नीतिगत दर रेपो में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है जो अब 5.5 प्रतिशत है।

आरबीआई ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को पहले के 2.6 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अपना अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। भारत ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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