असम में दुनिया के पहले बांस एथनॉल संयंत्र के लिए 30,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

असम में दुनिया के पहले बांस एथनॉल संयंत्र के लिए 30,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

असम में दुनिया के पहले बांस एथनॉल संयंत्र के लिए 30,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
Modified Date: February 17, 2026 / 06:47 pm IST
Published Date: February 17, 2026 6:47 pm IST

(त्रिदीप लहकर)

नुमालीगढ़ (असम), 17 फरवरी (भाषा) असम बायो एथनॉल प्राइवेट लिमिटेड (एबीईपीएल) अगले तीन साल में दुनिया के इकलौते दूसरी-पीढ़ी के बायोएथनॉल संयंत्र के लिए बांस प्राप्त करने को 30,000 से ज़्यादा किसानों से हाथ मिलाने का लक्ष्य बना रही है। 4,930 करोड़ रुपये की लागत वाले इस संयंत्र की स्थापित उत्पादन क्षमता 4,900 करोड़ टन प्रति वर्ष है। इसका उद्घाटन पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था, और अभी सीमित कच्चे माल स्रोत के साथ इसे स्थिर बनाया जा रहा है।

एबीईपीएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रूपज्योति हजारिका ने पीटीआई-भाषा को एक साक्षत्कार में बताया, ‘‘अभी हम स्टार्टअप चरण से गुजर रहे हैं। अगले हफ्ते के अंदर, हम संयंत्र को स्थिर कर पाएंगे। इसके बाद, हम पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करेंगे।’’

असम के गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में मौजूद यह संयंत्र दुनिया का एकमात्र वाणिज्यिक दूसरी पीढ़ी का उत्पादक बायोएथनॉल संयंत्र है जो कच्चे माल के तौर पर बांस का इस्तेमाल करता है। बाकी सभी प्रथम पीढ़ी के एथनॉल संयंत्र बायोमास के तौर पर गन्ना या मक्का जैसी खाद्य फसलों का इस्तेमाल करते हैं।

एथनॉल के अलावा, यह संयंत्र हर साल 19,000 टन फरफ्यूरल, 11,000 टन एसिटिक एसिड, 32,000 टन लिक्विड कार्बन डायआक्साइड और 25 मेगावाट हरित बिजली भी बनाएगा।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

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