(नीलाभ श्रीवास्तव)
जगदलपुर, 18 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के एक दूरस्थ गांव में सुरक्षा शिविर को परिवर्तित करके बनाए गए पहले जनसेवा केंद्र का उद्घाटन किया। दशकों तक जारी उग्रवाद के बाद हाल ही में नक्सली हिंसा से मुक्त घोषित किए गए छत्तीसगढ़ में यह उद्घाटन विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
मंत्री ने कहा कि राज्य में पूर्व में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित कुल 196 सुरक्षा बल शिविरों में से 70 को अगले डेढ़ वर्षों में ‘सेवा शिविरों’ (जनसेवा केंद्रों) में परिवर्तित किया जाएगा।
अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह कार्यक्रम ‘बस्तर 2.0 रूपरेखा’ की शुरुआत का प्रतीक है, जिसके तहत सुरक्षा शिविरों को जन कल्याणकारी कार्यों के लिए पुनर्परिभाषित किया जाएगा। यह केंद्र और राज्य सरकार की एक आवश्यक कार्य योजना है, जिसका उद्देश्य विकास की कमी के कारण इन क्षेत्रों में माओवाद की पुनरावृत्ति को रोकना है।
शाह मध्य भारत के इस राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। मार्च में केंद्र सरकार द्वारा देश से वामपंथी उग्रवाद के अंत की घोषणा के बाद यह उनका पहला दौरा है।
वह रविवार रात को राज्य की राजधानी रायपुर पहुंचे, जो यहां से 300 किलोमीटर से अधिक दूर है।
मंत्री ने नेतानार गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 80वीं बटालियन के ‘ब्रावो’ कंपनी परिसर में स्थित ‘जन सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन किया।
सीआरपीएफ ने 2013 में इस शिविर को एक अभियानगत बेस के रूप में स्थापित किया था और अब उसने इस शिविर का एक हिस्सा सेवा केंद्र के निर्माण के लिए साझा किया है।
शाह ने कहा, ‘‘आज इस क्षेत्र के शहीद वीर गुंडाधुर के नाम पर इस शिविर का उद्घाटन एक क्रांतिकारी घटना है। एक समय यहां छह पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी और नक्सलियों ने अस्पतालों और स्कूलों को नष्ट कर दिया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं वादा करता हूं कि हम अगले डेढ़ साल में रायपुर में बैठी राज्य सरकार को आपके दरवाजे तक लाएंगे।”
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के 196 सुरक्षा शिविरों में से 70 को अगले डेढ़ साल में ‘सेवा शिविरों’ में परिवर्तित किया जाएगा।
शाह ने कहा कि राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) को इन ‘सेवा शिविरों’ के लिए एक मॉडल तैयार करने का कार्य सौंपा गया है, जो न केवल जनता को सभी प्रकार की सरकारी सेवाएं प्रदान करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के लिए कौशल प्रदान करने में भी मदद करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के लिए दुग्ध उत्पादन और लघु वन उपज के लिए एक सहकारी समिति मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसमें बस्तर जिले सहित सात जिले शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि शाह ने लगभग चार दशकों के हिंसक नक्सलवाद के खात्मे के साथ बस्तर क्षेत्र में विकास सुनिश्चित किया है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लिए निर्धारित शिविरों को धीरे-धीरे पुनर्परिभाषित किया जा रहा है और राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से इन्हें सशस्त्र अभियानों के अड्डे से बदलकर जनसेवा केंद्र में परिवर्तित कर रही है।
उन्होंने बताया कि ‘जन सुविधा केंद्र’ एक साझा सेवा केंद्र (सीएससी) की तरह काम करेगा, जहां लोगों को आधार कार्ड अपडेट, बैंकिंग सुविधाएं, आय, जाति और निवास से जुड़े प्रमाणपत्र के लिए आवेदन, राशन कार्ड सेवाएं, आयुष्मान भारत कार्ड, ई-श्रम पंजीकरण, बिजली बिल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, रेलवे और बस टिकट बुकिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ये केंद्र स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की मदद से स्थानीय लोगों को आजीविका कौशल में प्रशिक्षण देंगे।
राज्य सरकार के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘जन सुविधा केंद्र की यह पहल उन गांवों के लिए महत्वपूर्ण है जहां लोगों को बुनियादी सरकारी योजनाओं या सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।’’
नेतनार गांव की पिंकी नाग ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने 13 मई से सेवा केंद्र में सिलाई का प्रशिक्षण शुरू किया है और उनका लक्ष्य इस कौशल से प्रति माह 6,000 रुपये कमाना है।
‘सुरक्षा शिविर’, जो कभी नक्सल-रोधी अभियानों की रणनीति बनाने का केंद्र हुआ करते थे, जल्द ही विकास के द्वार के रूप में जाने जाएंगे।
स्थानीय स्वयं सहायता समूह के साथ काम करने वाली नीतू सेठिया ने उद्घाटन के बाद कहा, ‘‘नेतानार शिविर आगे की राह दिखाएगा।’’
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों द्वारा 536 माओवादियों को मार गिराया गया, 2,943 ने आत्मसमर्पण किया और 2,039 को गिरफ्तार किया गया। छत्तीसगढ़ कभी देश का सबसे अधिक नक्सल हिंसा प्रभावित राज्य माना जाता था।
नेतानार शिविर आगे का रास्ता दिखाएगा,” स्थानीय स्वयं सहायता समूह के साथ काम करने वाली नीतू सेठिया ने उद्घाटन के बाद कहा।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार,कभी देश का सबसे अधिक नक्सल हिंसा प्रभावित राज्य माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों द्वारा 536 माओवादियों को मार गिराया गया, 2,943 ने आत्मसमर्पण किया और 2,039 को गिरफ्तार किया गया।
भाषा संतोष माधव
माधव