Chhattisgarh High Court Rape Case: मर्जी से शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं, अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, पीड़िता के इस बयान से बदली पूरी कहानी

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Chhattisgarh High Court Rape Case: मर्जी से शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं, अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, पीड़िता के इस बयान से बदली पूरी कहानी

Chhattisgarh High Court Rape Case/Image Source: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
  • ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
  • राज्य सरकार की अपील खारिज

बिलासपुर: Chhattisgarh High Court Rape Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि यदि पीड़िता स्वयं सहमति से आरोपी के साथ गई और संबंध बने, तो ऐसे मामले में रेप और अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं होता। कोर्ट ने इस आधार पर अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने पलटा केस का रुख (Bilaspur High Court News)

राज्य शासन ने विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार), रायपुर के 31 अगस्त 2023 के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इसमें आरोपी धर्मेंद्र कुमार को अपहरण, दुष्कर्म और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया गया था। पीड़िता ने 14 जनवरी 2022 को थाना इंदागांव, जिला गरियाबंद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 जनवरी 2022 को आरोपी उसे मोटरसाइकिल से अपने गांव ले गया और शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने कहा कि वह अनुसूचित जाति से है और उससे विवाह नहीं करेगा। इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की गई थी।

कोर्ट ने पाया- सहमति से संबंध (Rape Case Verdic)

Chhattisgarh High Court Rape Case: पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया, जिसमें डॉक्टर ने उसके शरीर पर कोई आंतरिक या बाहरी चोट नहीं पाई। मेडिकल रिपोर्ट में जबरदस्ती यौन संबंध होने की पुष्टि नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था। वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ मोटरसाइकिल पर गई और कई बार रात में स्वयं मिलने भी गई। डॉक्टर के सामने उसने बताया कि जबरदस्ती शारीरिक संबंध नहीं बनाए गए। अदालत में उसने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस द्वारा लिखी गई रिपोर्ट पर उसने केवल हस्ताक्षर किए थे और बयान पुलिस और परिजनों के कहने पर दिया।

अपराध सिद्ध नहीं हुआ (Bilaspur Court Order)

Chhattisgarh High Court Rape Case: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप केवल तभी किया जा सकता है, जब वह पूरी तरह अवैध या असंभव प्रतीत हो। अभियोजन पक्ष अपहरण या दुष्कर्म को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा। चूंकि मुख्य अपराध सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए एससी-एसटी एक्ट भी लागू नहीं होता। इन सभी कारणों से हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

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"Chhattisgarh High Court Rape Case Verdict" में क्या फैसला आया?

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि संबंध सहमति से बने हों, तो दुष्कर्म और अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं होता और राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

"SC ST Act Case Chhattisgarh" क्यों खारिज हुआ?

मुख्य अपराध (अपहरण और दुष्कर्म) सिद्ध नहीं होने के कारण एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं माना गया।

"Consent in Rape Case Law India" में सहमति का क्या महत्व है?

यदि अदालत में यह साबित हो जाए कि संबंध आपसी सहमति से बने थे, तो दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं होता।