Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Chhattisgarh High Court Rape Case/Image Source: symbolic
बिलासपुर: Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने विवाह का झूठा प्रलोभन देकर दुष्कर्म और अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता स्वयं सहमति से आरोपी के साथ गई और संबंध बने, तो ऐसे मामले में जबरदस्ती या अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं होता। यह निर्णय न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया।
Chhattisgarh High Court: यह आपराधिक अपील राज्य शासन द्वारा विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार), रायपुर के 31 अगस्त 2023 के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें आरोपी धर्मेंद्र कुमार को अपहरण, दुष्कर्म और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया गया था। जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने 14 जनवरी 2022 को थाना इंदागांव, जिला गरियाबंद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 जनवरी 2022 को आरोपी उसे मोटरसाइकिल से अपने गांव ले गया और शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने कहा कि वह अनुसूचित जाति से है और उससे विवाह नहीं करेगा। इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की गई थी।
Chhattisgarh High Court: जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया, जिसमें डॉक्टर ने उसके शरीर पर कोई आंतरिक या बाहरी चोट नहीं पाई। मेडिकल रिपोर्ट में जबरदस्ती से यौन संबंध होने की पुष्टि नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था। वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ मोटरसाइकिल पर गई और कई बार रात में स्वयं मिलने भी गई। डॉक्टर के सामने उसने बताया कि जबरदस्ती शारीरिक संबंध नहीं बनाए गए। अदालत में उसने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस द्वारा लिखी गई रिपोर्ट पर उसने केवल हस्ताक्षर किए थे और बयान पुलिस और परिजनों के कहने पर दिया।
हाईकोर्ट ने जाफरुद्दीन बनाम केरल राज्य (2022) के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप केवल तभी किया जा सकता है, जब वह पूरी तरह अवैध या असंभव प्रतीत हो। अभियोजन पक्ष अपहरण या दुष्कर्म को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा। चूंकि मुख्य अपराध सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए एससी/एसटी एक्ट भी लागू नहीं होती। इन सभी कारणों से हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए आरोपी धर्मेंद्र कुमार की बरी को बरकरार रखा।