Chhattisgarh High Court Decision : जवानों की सुरक्षा से समझौता नहीं! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लिया ऐतिहासिक फैसला, अब शारीरिक क्षमता देखकर ही तय होगी ड्यूटी

High Court of Chhattisgarh ने नक्सली हमले में घायल आरक्षक की नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापना पर रोक लगाते हुए कहा कि जवानों की शारीरिक स्थिति के अनुसार ही ड्यूटी तय की जानी चाहिए।

Chhattisgarh High Court Decision : जवानों की सुरक्षा से समझौता नहीं! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लिया ऐतिहासिक फैसला, अब शारीरिक क्षमता देखकर ही तय होगी ड्यूटी

Chhattisgarh High Court Decision / Image Source : IBC24 /FILE

Modified Date: March 21, 2026 / 11:28 pm IST
Published Date: March 21, 2026 11:18 pm IST
HIGHLIGHTS
  • नक्सली हमले में घायल आरक्षक को फिर संवेदनशील क्षेत्र भेजने पर कोर्ट सख्त
  • High Court of Chhattisgarh ने DGP सर्कुलर का हवाला देते हुए आदेश दिया
  • मैदानी जिले में पदस्थापना आवेदन पर तत्काल निर्णय के निर्देश

बिलासपुर : Chhattisgarh High Court Decision नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे जवानों को उनकी शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज कर संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थ नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम नागरदा निवासी दिनेश ओगरे, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन सकरी बिलासपुर में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2016 में बीजापुर जिले के पामेड़ क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान नक्सली हमले में उनके सिर में गोली लग गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर भी हुआ। इन परिस्थितियों के बावजूद पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा उनकी पुनः नक्सल प्रभावित क्षेत्र अदवाड़ा कैंप, जिला बीजापुर में पदस्थापना कर दी गई।

हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

इस मामले में दिनेश ओगरे ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। Bilaspur High Court News, याचिका में तर्क दिया गया कि पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा 3 सितम्बर 2016 और 18 मार्च 2021 को जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश हैं कि नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ड्यूटी ली जाए और उन्हें घोर नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थापित न किया जाए।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भेजना DGP के सर्कुलर का उल्लंघन

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए उसे फिर से नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भेजना DGP के सर्कुलर का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी माना कि गंभीर रूप से घायल जवान को ऐसी परिस्थितियों में भेजना न केवल अनुचित है, बल्कि उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ भी समझौता है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) प्रशासन और ADGP, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल को निर्देशित किया है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा मैदानी जिले में पदस्थापना के लिए दिए गए आवेदन पर तत्काल निर्णय लें।

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