CG News: हाईकोर्ट ने रद्द किया छत्तीसगढ़ DGP का पदोन्नति निरस्तीकरण आदेश, याचिकाकर्ता को उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने का दिया निर्देश

CG News: कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने और सभी परिणामी लाभ तीन माह के भीतर प्रदान करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।

CG News: हाईकोर्ट ने रद्द किया छत्तीसगढ़ DGP का पदोन्नति निरस्तीकरण आदेश, याचिकाकर्ता को उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने का दिया निर्देश
Modified Date: October 7, 2025 / 09:55 pm IST
Published Date: October 7, 2025 9:14 pm IST
HIGHLIGHTS
  • DGP द्वारा 08 अगस्त 2022 को पदोन्नति निरस्तीकरण आदेश जारी
  • सभी परिणामी लाभ तीन माह के भीतर प्रदान करने का निर्देश
  • याचिकाकर्ता को उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने का निर्देश

बिलासपुर: CG News, बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ DGP द्वारा 08 अगस्त 2022 को जारी पदोन्नति निरस्तीकरण आदेश को अवैध और मनमाना करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति देने और सभी परिणामी लाभ तीन माह के भीतर प्रदान करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।

read more:  अगर दिल में जुनून होता तो वेस्टइंडीज टीम टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका ढूंढ लेती: लारा

याचिकाकर्ता ने डीजीपी के आदेश को चुनोती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता सहायक उप निरीक्षक के पद पर थाना सोनक्यारी, जिला जशपुर में पदस्थ थे। पुलिस मुख्यालय द्वारा 21 मई 2021 को पदोन्नति हेतु पात्रता सूची प्रकाशित की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम क्रमांक 138 पर शामिल था। इसके कुछ समय बाद 18 नवम्बर 2021 को याचिकाकर्ता पर कर्तव्यों में लापरवाही के आरोप में वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने की लघु दंड की सजा दी गई। इसी आधार पर पुलिस महानिदेशक ने याचिकाकर्ता की पदोन्नति निरस्त कर दी।

read more:  बजाज फिनसर्व ने बीमा कंपनियों को बजाज जनरल इंश्योरेंस, बजाज लाइफ इंश्योरेंस का नया नाम दिया

लघु सजा को पूर्व प्रभाव देकर पदोन्नति निरस्त करना कानून के विपरीत

CG News, मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुये बताया गया कि पात्रता सूची तैयार होने की तिथि पर याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडादेश अस्तित्व में नहीं था। लिहाजा बाद में दी गई लघु सजा को पूर्व प्रभाव देकर पदोन्नति निरस्त करना कानून के विपरीत है। यह भी कहा गया कि विभागीय पदोन्नति समिति DPC ने पहले ही याचिकाकर्ता को पदोन्नति के योग्य पाया था। अतः बाद में दी गई सजा के आधार पर पदोन्नति से वंचित करना मनमाना निर्णय है।

read more:  Pendra News: 4 साल तक हाथ के बल उल्टे चलकर 3500 KM की नर्मदा परिक्रमा, बाबा की तपस्या देख हर कोई रह गया दंग, धर्मराज पुरी महाराज की अकल्पनीय यात्रा

राज्य की ओर से यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता की पदोन्नति का आदेश जारी नहीं हुआ था, केवल पात्रता सूची बनाई गई थी और चूंकि बाद में दंड दिया गया, इसलिए उसे पदोन्नति नहीं दी जा सकती थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पात्रता सूची में केवल गंभीर दंड को ही पदोन्नति को प्रभावित करने वाला माना गया था, जबकि लघु दंड का कोई उल्लेख नहीं था। इसलिए अधिकारियों द्वारा लघु दंड के आधार पर पदोन्नति निरस्त करना अपने आप में विरोधाभासी और मनमाना है।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com