Reported By: Star Jain
,CG Rice Mill News | Photo Credit: IBC24
रायपुर: CG Rice Mill News छत्तीसगढ़ के राइस मिलर आज एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहे हैं। एक तरफ बैंकों का बढ़ता ब्याज है, तो दूसरी तरफ एफसीआई के गोदामों में ‘नो एंट्री’। राज्य में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास पर्याप्त जगह न होने के कारण मिलरों से चावल का उठाव नहीं हो पा रहा है। सिस्टम में स्टोरेज की कमी की वजह से करोड़ों रुपये का धान का स्टॉक मिलों के कैंपस में ही पड़ा है। हालत यह है कि कई मिलें हफ्ते में सिर्फ एक दिन चल पा रही हैं, जिससे मिलरों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ गया है। संकट सिर्फ मिलरों तक सीमित नहीं है। मिलों के ठप होने से हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। उधर, बैंक के कर्ज और उस पर चढ़ते ब्याज ने मिलरों की कमर तोड़ दी है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अब मिलरों ने अब सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। छत्तीसगढ़ में राइस मिलिंग का संकट गहराता जा रहा है। मिलरों का कहना है कि अगर इन चार बिंदुओं पर सरकार ने तुरंत फैसला नहीं लिया, तो प्रदेश की सैकड़ों मिलें हमेशा के लिए बंद हो सकती हैं।
वर्तमान में पिछले सीजन का चावल अब तक केंद्रों में जमा नहीं हो पाया है, जबकि नए सीजन की मिलिंग शुरू हो गई है। मिलरों की मांग है कि पुराने और नए स्टॉक के जमा करने की प्रक्रिया में ‘ओवरलैपिंग’ को खत्म किया जाए ताकि पुराने स्टॉक का उठाव जल्द हो और नए के लिए जगह बने।
छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में चावल भेजने के लिए रेलवे रेक की उपलब्धता सबसे बड़ी बाधा है। मिलरों की मांग है कि केंद्र सरकार और रेलवे समन्वय बनाकर रेक की संख्या बढ़ाएं, ताकि यहां के गोदाम खाली हों और मिलों से चावल का उठाव शुरू हो सके।
मिलर चाहते हैं कि सरकार Open Market Sale Scheme के तहत अतिरिक्त चावल को बाजार में बेचने की अनुमति दे। इससे एफसीआई के गोदामों पर दबाव कम होगा और मिलरों को उनके स्टॉक का सही मूल्य मिल सकेगा।
स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए मिलरों ने PEGS के तहत नए गोदामों के निर्माण और निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की मांग की है। उनका तर्क है कि जब तक राज्य में भंडारण की क्षमता नहीं बढ़ेगी, तब तक हर साल यह संकट खड़ा होगा।