लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का शासकीय संकल्प छत्तीसगढ़ विस में पेश

लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का शासकीय संकल्प छत्तीसगढ़ विस में पेश

लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का शासकीय संकल्प छत्तीसगढ़ विस में पेश
Modified Date: April 30, 2026 / 01:48 pm IST
Published Date: April 30, 2026 1:48 pm IST

रायपुर, 30 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में एक शासकीय संकल्प पेश किया, जिसमें परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को तत्काल लागू करने का आग्रह किया गया है।

इस संकल्प पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।

संकल्प पेश करते हुए साय ने कहा कि इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के सम्मान तथा महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण के उद्देश्य से देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने संकल्प पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया है।

इस बीच, विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने कहा कि उन्होंने भी इसी तरह का एक संकल्प पेश किया था, जिसमें केंद्र से आग्रह किया गया था कि लोकसभा और विधानसभा में मौजूदा सीटों की संख्या के भीतर ही महिलाओं को जल्द से जल्द 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, लेकिन उनके संकल्प पर विचार नहीं किया गया।

इसके जवाब में अध्यक्ष ने कहा कि महंत का संकल्प एक अशासकीय संकल्प था जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था, क्योंकि विशेष सत्र का एजेंडा पहले से ही तय था।

उन्होंने कहा कि यह सत्र सरकारी कामकाज के लिए बुलाया गया था और उन्होंने विपक्ष के संकल्प को अस्वीकार कर दिया।

हालांकि, महंत ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री ने जो पढ़ा, वह शासकीय संकल्प की श्रेणी में नहीं आता है।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने पहले (सदन के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए) कहा था कि उनकी सरकार (इस मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ) एक निंदा प्रस्ताव लाएगी।

महंत ने आरोप लगाया कि मौजूदा संकल्प जल्दबाजी में पेश किया गया है और इसका शुरू में बताए गए विषय से कोई लेना-देना नहीं है।

भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि चर्चा के विषयों का निर्णय करना सदन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सदन के बाहर दिए गए बयानों पर सदन के भीतर चर्चा नहीं की जा सकती।

इस नोंकझोंक के कारण सदन में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ।

इस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

भाषा संजीव मनीषा अविनाश

अविनाश


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