Chhattisgarh High Court Divorce Case: पति को ‘मोटा और सांवला’ कहने से हो जाएगा तलाक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा?

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Chhattisgarh High Court Divorce Case: पति को 'मोटा और सांवला' कहने से हो जाएगा तलाक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा?

Chhattisgarh High Court Divorce Case: पति को 'मोटा और सांवला' कहने से हो जाएगा तलाक, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए क्या कहा? /image: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • ‘मोटा और सांवला’ कहना तलाक के लिए पर्याप्त नहीं
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज की
  • क्रूरता के आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court Divorce Case: तलाक के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) ने तलाक की मांग नामंजूर करते हुए टिप्पणी किया है कि पति को मोटा और सांवला कहने से क्रूरता और परित्याग के लिए आवश्यक तथ्य साबित नहीं हो रहा है। हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय जांजगीर चांपा के फैसले को बरकरार रखा है।

सिर्फ 3 महीने ही रहे साथ (Husband Wife Divorce Case)

हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने बीते 18 सितंबर के जांजगीर चांपा के निर्णय को बरकरार रखा है। बता दें कि आकाश और पूजा की शादी 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। पति का कहना है कि उसकी पत्नी सिर्फ 3 महीने उसके साथ रही और इसके बाद दोनों में विवाद जैसी स्थिति बनती चली गई।

हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अपील (Divorce Cruelty Case)

Chhattisgarh High Court Divorce Case पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उसके साथ गलत व्यवहार करती थी और आए दिन छोड़ने की धमकी देती रहती थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति के द्वारा आरोप तो बहुत सारे लगाए गए हैं, लेकिन आरोपों के मद्देनजर पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं है। मोटा और सांवला कहना भी तलाक के लिए पर्याप्त क्रूरता का आधार नहीं है, यह कहते हुए हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी है।

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क्या पति को ‘मोटा और सांवला’ कहना तलाक का आधार है?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस मामले में अदालत ने कहा कि केवल पति को ‘मोटा और सांवला’ कहना तलाक के लिए आवश्यक क्रूरता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हाईकोर्ट ने पति की अपील क्यों खारिज की?

अदालत ने पाया कि पति की ओर से कई आरोप लगाए गए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।

यह मामला किस हाईकोर्ट का है?

यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर का है। कोर्ट ने परिवार न्यायालय जांजगीर-चांपा के फैसले को बरकरार रखा।

पति-पत्नी की शादी कब हुई थी?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और पति के अनुसार वे करीब तीन महीने साथ रहे।

क्या इस फैसले में तलाक दिया गया?

नहीं। हाईकोर्ट ने पति की तलाक संबंधी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।