छत्तीसगढ़ : एनआईए की विशेष अदालत ने हत्या के मामले में एक दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई
छत्तीसगढ़ : एनआईए की विशेष अदालत ने हत्या के मामले में एक दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई
कांकेर, 17 सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 2019 में नक्सलवाद से जुड़ी घटना में 19 साल के एक युवक के अपहरण और हत्या के मामले में एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जिले के भानुप्रतापपुर के विशेष सत्र न्यायाधीश (एनआईए) दीपक के गुप्ता की अदालत ने बुधवार को पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम (35) को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिकनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त 2019 को कोयलीबेड़ा पुलिस थाना क्षेत्र के जुगडा गांव से श्यामनाथ आंचला का अपहरण हथियारबंद और वर्दीधारी नक्सलियों के एक समूह ने कर लिया था। इस समूह में शंकर, मुकेश, मीना नेताम, मैनू नुरेटी, पीलूराम और कमलेश के साथ 25-30 अन्य लोग शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि बाद में नक्सलियों ने एक ‘जन अदालत’ लगाई और पुलिस मुखबिर होने के शक में श्यामनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी।
कथित तौर पर माओवादियों द्वारा छोड़े गए एक पर्चा में कहा गया था कि पीड़ित के पिता सुनहेर और उनके बेटे श्यामनाथ पुलिस मुखबिर के तौर पर काम कर रहे थे।
शिकायत के बाद, कोयलीबेड़ा पुलिस थाना में पीलूराम और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष ने आगे बताया कि मई 2023 में सीमा सुरक्षा बल और जिला रिजर्व गार्ड के संयुक्त अभियान के दौरान, सुरक्षाकर्मियों ने ज़िले में केसकोडी के पास एक जंगली इलाके में पीलूराम आंचला उर्फ़ सालिक राम और दो अन्य लोगों को पकड़ लिया।
उन्होंने बताया कि आरोपी के पास से कथित तौर पर एक काला वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी साहित्य, पत्र और छह हजार रुपये नकद बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान, कथित तौर पर सालिक राम और एक अन्य आरोपी ने सुरक्षा बलों को बताया कि उन्होंने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए धुट्टा-चिलपारिस रोड पर बारूदी सुरंग लगाया था।
हालांकि, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सालिक राम कागबरस गांव का एक किसान था और उसे झूठे मामले में फंसाया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने जुगड़ा गांव के सालिक आंचला की पहचान की थी, जबकि आरोपी कागबार्स का रहने वाला था।
हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी उचित संदेह के यह साबित कर दिया था कि सालिक राम ने पांच या उससे अधिक सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक गैर-कानूनी समूह बनाया, श्याम नाथ का उनके घर से अपहरण किया और उन्हें जंगल ले गए, जहां गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
अदालत ने कहा, ‘…अभियोजन पक्ष के गवाहों और जांच अधिकारी के बयानों से यह स्पष्ट है कि घटना के दिन, आरोपी पीलूराम आंचला, उर्फ सालिक राम ने अन्य नक्सलियों के साथ मिलकर मृतक श्यामनाथ आंचला को उनके घर से दूसरी जगह ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी।’
अदालत ने उसे यूएपीए की धाराओं के तहत आरोपों से बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि वह किसी प्रतिबंधित माओवादी संगठन का सदस्य या सक्रिय सहयोगी था।
हालांकि, अदालत ने आरोपी पीलूराम आंचला को हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
भाषा सं संजीव मनीषा रंजन
रंजन

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