Bandhavgarh Tigers Death: रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा, ढाई महीने में आठ बाघों की मौत.. इस राज्य में देश के 25 फ़ीसदी बाघ है मौजूद

Bandhavgarh Tigers Death Report: बांधवगढ़ में दो महीनों में आठ बाघों की मौत, चार करंट से; हाईकोर्ट ने मांगा जवाब।

Bandhavgarh Tigers Death: रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा, ढाई महीने में आठ बाघों की मौत.. इस राज्य में देश के 25 फ़ीसदी बाघ है मौजूद

Bandhavgarh Tigers Death || Image- IBC24 News File

Modified Date: February 26, 2026 / 03:28 pm IST
Published Date: February 26, 2026 3:25 pm IST
HIGHLIGHTS
  • दो महीनों में आठ बाघों की मौत
  • चार बाघों की करंट से मृत्यु
  • हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

जबलपुर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बांधवगढ़ अभयारण्य में साल 2025 के अंतिम और 2026 के शुरुआती ढाई महीनों की अवधि में आठ बाघों की मौत हो गई। इनमें से चार बाघों की मौत करंट लगने से हुई। (Bandhavgarh Tigers Death Report) बांधवगढ़ के क्षेत्र निदेशक द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि चार बाघों की मौत अभयारण्य के भीतर हुई, जबकि चार ने ‘सामान्य वन क्षेत्र’ में जान गंवाई। अभयारण्य के भीतर हुई सभी मौतों को प्राकृतिक बताया गया है, जबकि सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से चार बाघों की मौत हुई। यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश के जंगलों में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघों की मौत के संबंध में दायर याचिका पर उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्थिति रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 25 मार्च तय की है।

‘टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में बाघों का जीवन असुरक्षित होने का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, 21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच आठ बाघों की मौत दर्ज की गई। अभयारण्य के भीतर दो बाघों की मौत आपसी संघर्ष में, एक की कुएं में डूबने से और एक की बीमारी के कारण हुई। वहीं वन क्षेत्र में बिजली का करंट लगने से चार बाघों की मौत की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में कोर और बफर जोन के भीतर बिजली लाइनों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण मानकों के पालन और बिजली तारों को सुव्यवस्थित करने के लिए समय-समय पर बिजली विभाग को पत्र भेजे गए हैं। साथ ही गश्त व्यवस्था की जानकारी भी दी गई और सरकार ने मुख्य याचिका पर जवाब प्रस्तुत किया है।

भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर याचिका में ‘टाइगर स्टेट’ मध्यप्रदेश में बाघों का जीवन असुरक्षित होने का दावा किया गया है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2025 में राज्य में 54 बाघों की मौत हुई, जो एक साल में सबसे अधिक है। याचिकाकर्ता के अनुसार ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के बाद यह किसी एक वर्ष में सर्वाधिक मौतें हैं और इनमें से 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं।

दुनिया में बाघों की कुल आबादी 5,421

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। (Bandhavgarh Tigers Death Report) याचिका में राज्य में बाघों के शिकार पर नियंत्रण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने, विशेषज्ञों की सिफारिशें लागू करने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का आग्रह किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि दुनिया में बाघों की कुल आबादी 5,421 है, जिनमें से 3,167 भारत में हैं और लगभग 25 प्रतिशत यानी 785 बाघ मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं। इसके बावजूद 2025 में 54, वर्ष 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघों की मौत दर्ज की गई। याचिका में कहा गया है कि इन मौतों में 57 फीसदी अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं, जिनमें आपसी संघर्ष, करंट लगना और अन्य संदिग्ध हालात शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि भारत में बाघों की घटती आबादी की रक्षा के लिए 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया गया था। मध्यप्रदेश में कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा, संजय-धुबरी, वीरांगना, दुर्गावती, रातापानी और माधव सहित नौ बाघ अभयारण्य हैं।


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