Padma Shri Award 2026: वर्षों तक बस्तर के जंगलों में करते रहे सेवा, बदल दी हजारों जिंदगियां, अब महान समाजसेवी को डॉ. बुधरी ताती को मिला देश का बड़ा सम्मान

Dr Budhri Tati Padma Shri: वर्षों तक बस्तर के जंगलों में करते रहे सेवा, बदल दी हजारों जिंदगियां, अब महान समाजसेवी को डॉ. बुधरी ताती को मिला देश का बड़ा सम्मान

Padma Shri Award 2026: वर्षों तक बस्तर के जंगलों में करते रहे सेवा, बदल दी हजारों जिंदगियां, अब महान समाजसेवी को डॉ. बुधरी ताती को मिला देश का बड़ा सम्मान

Dr Budhri Tati Padma Shri | Photo Credit: AI

Modified Date: June 17, 2026 / 01:36 pm IST
Published Date: June 17, 2026 1:36 pm IST
HIGHLIGHTS
  • डॉ. बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान
  • पिछले 40 वर्षों से बस्तर के नक्सल प्रभावित और जनजातीय क्षेत्रों में कर रही हैं कार्य
  • महिला सशक्तीकरण, बालिका शिक्षा, कुपोषण उन्मूलन और नशामुक्ति अभियान में निभाई अहम भूमिका

नई दिल्ली: Dr Budhri Tati Padma Shri बस्तर संभाग के सुदूर, दुर्गम और नक्सल प्रभावित वनांचलों में स्वास्थ्य सेवा, कुपोषण के खिलाफ संघर्ष, बालिका शिक्षा, नशामुक्ति और महिला सशक्तीकरण की अलख जगाने वाले छत्तीसगढ़ के महान समाजसेवी -डॉ. बुधरी ताती (‘बड़ी दीदी’) को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म पुरस्कार’ (Padma Shri Award 2026) से सम्मानित किया गया। उन्होंने पिछले चार दशकों से जनजातीय और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।  (Padma Awards News)

500 गाँवों तक पैदल पहुँचकर सामाजिक परिवर्तन की अलख जगाने वाली महानायिका

Padma Shri Award छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गाँव की रहने वाली डॉ. बुधरी ताती को बस्तर अंचल का जनजातीय समाज अत्यंत सम्मान और स्नेह के साथ ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारता है। पिछले चार दशकों से अधिक समय से वे सुदूर वनांचलों में वनवासी कल्याण, बालिका शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किए हुए हैं। इसी मूक साधना और समाजसेवा के लिए उन्हें ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।

जब रास्ते नहीं थे, तब बनीं सहारा

डॉ. बुधरी ताती की सेवा यात्रा वर्ष 1984 में शुरू हुई थी, जब बस्तर के घने जंगलों में न सड़कें थीं, न मोबाइल नेटवर्क और न ही बुनियादी सुविधाएँ। उस दौर में आदिवासी समाज के बीच जाकर उनका विश्वास जीतना किसी चुनौती से कम नहीं था।

‘बड़ी दीदी’ ने अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा के नक्सल प्रभावित घने जंगलों के बीच सैकड़ों गाँवों की पैदल यात्राएँ कीं। उस समय वनवासी परिवार पूरी तरह वनोपज और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थे, जिसके कारण बच्चों की शिक्षा उपेक्षित रह जाती थी। बुधरी ताती ने माता-पिता को धैर्यपूर्वक समझाया कि शिक्षा ही उनके बच्चों के भविष्य को बदल सकती है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ सकती है।

महिला सशक्तीकरण की नई इबारत

‘बड़ी दीदी’ ने केवल बच्चों को स्कूल भेजने तक अपना कार्य सीमित नहीं रखा, बल्कि आदिवासी महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए।उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई एवं हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए। उनके प्रयासों से अनेक आदिवासी महिलाएँ आत्मनिर्भर बनकर अपने पैरों पर खड़ी हुईं। उनकी प्रेरणा से कई आदिवासी बेटियाँ आज विभिन्न अस्पतालों में नर्स के रूप में कार्यरत हैं।

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