रायपुरः Durg Tehsildar rejected बुधवार को दुर्ग तहसीलदार ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने दुर्ग शहर के सैंकड़ों लोगों को एक साथ बड़ी राहत दी। लेकिन ये राहत फौरी है स्थाई ये अब तक साफ नहीं है। दरअसल, वक्फ बोर्ड रायपुर के CEO ने दुर्ग शहर की करीब 13 एकड़ जमीन पर अपना दावा किया। जिसके लिए वक्फ बोर्ड ने 7 आवेदन दिए। प्रक्रिया के तहत मामला तहसीलदार के पास पहुंचा। जिन्होंने इसपर दावे आपत्तियां मंगवांई। जिस 13 एकड़ जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया वहां कई परिवार पीढ़ियों से काबिज हैं , कारोबार कर रहे हैं, जाहिर है इस दावे से वो सभी सकते में आ गए। शहरवासियों ने दावे के विरूद्ध 1711 आपत्तियां लगाईँ। जिसके बाद तहसीलदार ने वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया पर क्या इससे मामला पूरी तरह से खत्म हो गया? क्या ये राहत स्थाई है? आखिर इस मामले में आगे कानूनी पहलू क्या है?
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Durg Tehsildar rejected रायपुर वक्फ बोर्ड को दुर्ग तहसीलदार कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। दरअसल, वक्फ बोर्ड ने दुर्ग शहर की करीब 13 एकड़ जमीन पर अपना दावा ठोंका था। जिसे लेकर दुर्ग तहसीलदार ने 15 नवंबर को दावा-आपत्तियां मंगाई थी। इसमें एक आवेदन की कुल 5 एकड़ जमीन पर आपत्ति आई थी। इस मामले में आवदेक वक्फ बोर्ड जहां गैरहाजिर रहा वहीं 1711 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी को आधार बनाकर तहसीलदार ने वक्फ बोर्ड के सारे दावों को खारिज कर दिया।
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रायपुर वक्फ बोर्ड ने दुर्ग शहर के अलग-अलग स्थानों के लिए 7 आवेदन किए थे। एक आवेदन पर खसरा नंबर 21/2, 21/3, 29/2, 146/4, 109 की जमीन पर भी अपना दावा किया था। जो नयापारा, पंचशील नगर, प्रेस कॉम्प्लेक्स, मोती पारा समेत दूसरे स्पॉट हैं। वक्फ बोर्ड ने इन जमीनों को अपनी पंजी में दर्ज होने की बात कहते हुए आधिपत्य के लिए आवेदन लगाया था। जिस पर राजस्व न्यायालय दुर्ग ने 21 अक्टूबर को इश्तिहार जारी कर दावा-आपत्ति के लिए 15 नवंबर की तारीख तय की थी। 1711 लोगों की आपत्ति के आधार पर तहसीलदार कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया।