Tractor on Rent for Farmers: किसानों को सरकार किराए पर देगी ट्रैक्टर और कृषि यंत्र, हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेगी दुकान, जानिए कितना देना होगा शुल्क / Image: AI Generated
भोपाल: Tractor on Rent for Farmers मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों की सहूलियत के लिये प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक “कृषि यंत्र किराये की दुकान” अनिवार्य रूप से खोलने की तैयारी चल रही है। कृषक कल्याण वर्ष में जल्दी ही इस पहल के परिणाम मिलेंगे। छोटे और सीमांत किसानों को अपने खेत तैयार करने आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना आसान हो जायेगा। वर्तमान में ऐसे 5260 केन्द्र संचालित है। अब हर साल 1060 कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जायेगी।
Tractor on Rent for Farmers मध्यप्रदेश अब तेजी से कृषि यंत्रों के निर्माण में आत्मनिर्भर हो रहा है। विदिशा जिले ने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर उच्च गुणवत्ता के कृषि यंत्रों का निर्माण करना शुरू कर दिया है। ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रालिक ट्रॉली, कल्टीवेटर, प्लाउ जैसे उपकरण जिले में ही बनाये जा रहे है। यहां लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां है। यहां बने कृषि यंत्रों की मांग अन्य राज्यों और विदेशों में भी हो रही है। मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अलजीरिया, ग्वाटेमाल, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश में यहां से निर्मित उपकरण भेजे जा रहे है। छोटे किसानों को न्यूनतम सेवा शुल्क पर अत्याधुनिक कृषि यंत्रों की सेवाएं मिल रही है। युवा उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उषा एग्रो के मानस गुप्ता बताते हैं कि हम खेती में काम आने वाले यंत्र और उपकरण बनाते हैं, जैसे- लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर आदि। सभी उपकरण किसानों के लिए उपयोगी हैं। कब से ये काम शुरू किया? यह पूछने पर उन्होंने बताया किइस काम की शुरुआत पिताजी ने 1993 में की थी। शुरुआत छोटे पैमाने पर हुई, फिर धीरे-धीरे इसका विस्तार किया और अब तो हमारे उपकरण विदेशों में भी पहुंच रहे हैं। हमारे सबसे बड़े ग्राहक स्थानीय किसान हैं। हमारे उत्पादों का अधिकांश हिस्सा स्थानीय बाजार में ही खप जाता है, लेकिन हम देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में भी सप्लाय करते हैं। आज हमारे बनाए यंत्र और उपकरण 10 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं। इनमें नाइजीरिया, सूडान, केन्या, यूगांडा, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, घाना, अल्जीरिया, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। हमारा दो-तिहाई बिजनेस देश के अंदर होता है और एक-तिहाई कारोबार विदेशों में है। पूरे साल में करीब 4 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
शासन की मदद के संबंध में वे बताते है किहमें इस काम में डॉ. मोहन यादव जी की सरकार से बहुत मदद मिलती है। उत्पादन से लेकर व्यवसाय के विस्तार तक में सरकार की नीतियां हमारे लिए मददगार साबित हुई हैं। अपने उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाने में भी हमें सरकारी सहायता मिलती है। सरकार की पहल पर मैं जी-20 सम्मेलन में भी शामिल हुआ और इसके खर्च का करीब 75 प्रतिशत सरकार ने वहन किया।
विष्णु शर्मा, संजय उद्योग ट्रैक्टर से संबंधित उपकरण बनाते हैं जैसे कल्टीवेटर, प्लाऊ आदि। ये उपकरण किसानों के लिए उपयोगी हैं। ट्रैक्टर से किसान अपने खेतों को आसानी से तैयार करते हैं। इसमें जिन उपकरणों की जरूरत होती है वो सब बनाते हैं। उत्पादों की सप्लाई के संबंध में उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से विदिशा और उसके आसपास के जिलों में होती है। दूसरे राज्यों में भी पहुंचते हैं। हमारा सालाना व्यवसाय करीब 50 लाख रुपये का है। अपने काम की शुरुआत के संबंध में वे बताते है कि हमने वर्ष 2020 में कोरोना संकट के दौरान इसकी शुरुआत की थी। शुरुआत में ही किसानों ने हमारे उत्पादों को हाथों हाथ लिया। इससे हमारा उत्साह बढ़ा और हम लगातार इसके विस्तार की कोशिश कर रहे हैं। सरकार की ओर से हमारे जैसे अन्य लोगों के लिए प्रशिक्षण की सुविधा मिलना चाहिए। विपिन रघुवंशी, मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से कल्टीवेटर, प्लाऊ, लोडर, डिलोडर बनाते हैं। उत्पादों का अधिकांश हिस्सा विदिशा और उसके आसपास के इलाकों में ही खप जाता है। आसपास के जिलों के किसान भी हमारे यंत्र और उपकरण खरीदते हैं।
हमारे सभी उपकरण ऐसे हैं जो खेती के अलग-अलग स्तरों पर काम आते हैं। खेतों को तैयार करने से लेकर रोपनी, बोवनी और कटाई सभी कार्यों के लिए उपकरण बनाते हैं। किसानों का इनके बिना काम नहीं चलता। दीपक नरवरिया, मे. एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी ने बताया कि हमारा बाजार मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकांश यंत्र और उपकरण विदिशा और आसपास के इलाकों के किसानों की मांग पूरी करने में ही खप जाते हैं।सालाना कारोबार करीब 3 करोड़ रुपयों का है। हमारे सारे ग्राहक किसान और खेती से जुड़ी संस्थाएं हैं।