छत्तीसगढ़ में ईंधन बचाने के लिए पुलिस आरक्षक बैलगाड़ी में ले गया ‘बारात’
छत्तीसगढ़ में ईंधन बचाने के लिए पुलिस आरक्षक बैलगाड़ी में ले गया ‘बारात’
नारायणपुर (छत्तीसगढ़), 14 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मितव्ययता और ईंधन से चलने वाली गाड़ियों पर निर्भरता कम करने की अपील के बाद छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एक पुलिस आरक्षक ने अपनी बारात के लिए वाहनों के काफिले के बजाय पारंपरिक बैलगाड़ियों को चुना।
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक के सुरक्षाकर्मी के तौर पर तैनात कुबेर देहारी ने 12 मई को अपने गांव डुमरतराई की एक युवती से विवाह किया। यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूर है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मोटर गाड़ियों के काफिलों का इस्तेमाल करने के बजाय, देहारी ने बैलगाड़ियों के काफिले को चुना और बारात लगभग एक किलोमीटर का सफर तय कर दुल्हन के घर पहुंचा।
देहारी के बारात का वीडियो बुधवार शाम से सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बात करते हुए देहारी ने कहा, “हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, और नयी पीढ़ी को इन्हें बचाकर रखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में एक संदेश है। देश को मजबूत बनाने और संसाधनों को बचाने के लिए हर किसी की भागीदारी ज़रूरी है।”
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस पहल की तारीफ की है।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बृहस्पतिवार को एक पोस्ट में कश्यप ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की ईंधन बचाने की अपील का असर अब गांवों में भी दिख रहा है। नारायणपुर के डमरतराई में कुबेर देहारी बैलगाड़ी से बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचे। सादगी और संस्कृति से जुड़ी यह अनोखी बारात पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश बन गई।”
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे समय में जब अक्सर शादी के कार्यक्रमों पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, यह अनोखी बारात इलाके में चर्चा का विषय बन गयी और यह संदेश दिया कि आधुनिकीकरण के साथ-साथ संस्कृति, परंपराओं को संजोकर रखने के साथ राष्ट्रीय हित के प्रति जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया जाना चाहिए।
भाषा सं. संजीव प्रशांत
प्रशांत

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