झीरम घाटी हमले का फैसला: मुख्यमंत्री ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया, कांग्रेस ने कहा ‘अधूरा न्याय’
झीरम घाटी हमले का फैसला: मुख्यमंत्री ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया, कांग्रेस ने कहा ‘अधूरा न्याय’
रायपुर, 16 सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में 10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को ‘‘न्याय की जीत’’ बताया।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सजा को ‘‘अधूरा न्याय’’ करार दिया और कहा कि इस नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता अब भी आजाद घूम रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने बुधवार को इस मामले में सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे।
मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया। मामले में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को जगदलपुर एनआईए अदालत द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।’’’
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हो गया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है। भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। झीरम के उस क्रूर हमले में अपने प्राण गंवाने वाली सभी दिवंगत आत्माओं को नमन। विनम्र श्रद्धांजलि।’’
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस फैसले से पता चलता है कि एनआईए की जांच बहुत बारीकी से की गई थी।
कवर्धा में संवाददाताओं से बातचीत में शर्मा ने कहा कि जांच के दौरान पेश किए गए सबूतों पर विचार करने के बाद अदालत ने मौत की सजा सुनाई।
उन्होंने कहा, ‘‘आज यह साफ़ हो गया है कि एनआईए ने बहुत मेहनत और ईमानदारी से जांच की। कांग्रेस ने बिना किसी ठोस आधार के इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की।’’
फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि उनकी नाराजगी का कोई आधार नहीं है।
शर्मा ने कहा, ‘‘जब बघेल मुख्यमंत्री थे, तो वे कहते थे कि झीरम घाटी से जुड़े सबूत उनकी जेब में हैं। उन्होंने उन्हें सामने क्यों नहीं रखा?’’
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिनके पास अतिरिक्त सबूत हैं, वे अब भी एनआईए के सामने उन्हें पेश कर सकते हैं।”
तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाले और कथित तौर पर झीरम हमले में शामिल वरिष्ठ माओवादी नेताओं के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा कि सरकार की समर्पण और पुनर्वास नीति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘पुनर्वास नीतियां सरकार परिस्थितियों के अनुसार तय करती हैं। जिन्होंने समर्पण किया है, उनसे समर्पण नीति के तहत लागू प्रक्रिया के अनुसार निपटा जाएगा।’’
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि माओवादियों के ‘‘पैदल सैनिकों’’ को दी गई सजा न तो उचित थी और न ही इसे न्याय कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन्होंने षडयंत्र रचा और जिन्होंने इस जनसंहार को अंजाम दिया वे तो अब भी बाहर खुले घूम रहे हैं।’’
इस मामले में दोषी ठहराए गए जोगा मड़कामी के करीबी रिश्तेदार बरसा वेट्टी ने सवाल उठाया कि आत्मसमर्पण करने वाले और कथित तौर पर झीरम हमले में शामिल वरिष्ठ माओवादी नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।
संवाददाताओं से बात करते हुए वेट्टी ने कहा कि जिन्हें वे निर्दोष आदिवासी मानते हैं, उन्हें दोषी ठहराए जाने से वे दुखी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उनके मामा जोगा माओवादी नहीं थे और वे चिकपाल ग्राम पंचायत के सरपंच के तौर पर दो बार सेवा भी कर चुके थे।’’
वेट्टी ने दावा किया कि तब से दरभा डिवीजन के कई माओवादियों ने समर्पण कर दिया है और हमले में कथित तौर पर शामिल कुछ लोग या तो मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर वे लोग जिन्होंने कथित तौर पर इस घटना को अंजाम दिया, उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है और वे सरकार की हिरासत में हैं। तो फिर सरकार उनसे पूछताछ क्यों नहीं कर रही है?’’
जगदलपुर में सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि वह इसे न्याय नहीं मानतीं।
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर में माओवादियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था।
इस हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार शामिल थे।
भाषा सं संजीव गोला
गोला

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