Vijay Sharma on Naxalism: “नक्सलवाद खत्म होने का दावा करना हैप्पी न्यू ईयर जैसा जश्न नहीं”.. आखिर गृहमंत्री विजय शर्मा ने किस पर किया बड़ा पलटवार?

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Vijay Sharma on Naxalism: "नक्सलवाद खत्म होने का दावा करना हैप्पी न्यू ईयर जैसा जश्न नहीं".. आखिर गृहमंत्री विजय शर्मा ने किस पर किया बड़ा पलटवार?

vijay sharma/ image source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त अभियान तेज
  • अमित शाह ने तय की डेडलाइन
  • सरेंडर और कार्रवाई जारी प्रक्रिया

देश में नक्सलवाद को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने की डेडलाइन तय की है। इसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो गई है और लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि तय समय सीमा तक राज्य को नक्सलमुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

Naxalism in Chhattisgarh news: 31 मार्च की डेडलाइन पर सियासत तेज

छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर 31 मार्च की डेडलाइन पर सियासत तेज हो गई है।उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज कवर्धा बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह कोई जश्न मनाने वाला इवेंट नहीं है जो हो रहा है जश्न से कम है क्या.. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि झीरम घाटी हमला के सबूत जेब में लेकर घूमने की बात करने वाले 5 साल तक उन्हें सामने नहीं ला पाए। उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा 31 मार्च की रात 12 बजे नक्सलवाद खत्म होने का दावा करना हैप्पी न्यू ईयर जैसा जश्न नहीं है। इसके बाद भी सुरक्षा बलों को पूरी तरह सतर्क रहना होगा और एहतियात बरतने की जरूरत बनी रहेगी।

Deepak Baij reaction: दीपक बैज ने उठाए सवाल

इस बीच अम्बिकापुर में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Deepak Baij ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हो रहा है और पापा राव जैसे लोग सरेंडर कर रहे हैं, यह एक सकारात्मक संकेत है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे भी चाहते हैं कि राज्य पूरी तरह नक्सलमुक्त हो, लेकिन इस दौरान आदिवासियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। दीपक बैज ने चिंता जताते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि 31 मार्च के बाद किसी निर्दोष आदिवासी को नक्सली बताकर जेल भेज दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे या नहीं। बस्तर क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का खत्म होना अच्छी बात है, लेकिन इसके बाद आदिवासी समुदाय के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा हो सके।

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