BALCO Tax Dispute News : बालको पर निगम का शिकंजा! 100 करोड़ के टैक्स का हिसाब मांगेगा कोरबा, चिमनी की ऊंचाई ने उड़ाई कंपनी की नींद

कोरबा में बालको पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स बकाया का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन गया है। हाईकोर्ट में लंबित इस विवाद के चलते वसूली प्रक्रिया अटकी हुई है, जिससे नगर निगम की आय और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

BALCO Tax Dispute News :  बालको पर निगम का शिकंजा! 100 करोड़ के टैक्स का हिसाब मांगेगा कोरबा, चिमनी की ऊंचाई ने उड़ाई कंपनी की नींद

BALCO Tax Dispute News / Image Source : IBC24 / FILE


Reported By: dhiraj dubay,
Modified Date: April 12, 2026 / 05:37 pm IST
Published Date: April 12, 2026 5:37 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बालको पर 100 करोड़ से अधिक टैक्स बकाया का दावा
  • हाईकोर्ट में मामला लंबित, वसूली प्रक्रिया प्रभावित
  • 2017-18 से चल रहा विवाद अब बना बड़ा मुद्दा

कोरबा : BALCO Tax Dispute News  छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में Bharat Aluminium Company Limited (बालको) पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स बकाया का मामला अब एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन चुका है। नगर निगम द्वारा ताज़ा डिमांड 43 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही है, जबकि कुल संभावित देनदारी 100 करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंचने का अनुमान है। खास बात यह है कि चिमनी और संरचनाओं के आकलन को लेकर विवाद और गहराता नजर आ रहा है। यदि 16 फीट ऊंचाई को एक तल मानकर टैक्स निर्धारण किया जाता है, तो यह राशि कई करोड़ रुपये और बढ़ सकती है।

बकाया वसूली के लिए प्रक्रिया जारी है

नगर निगम का कहना है कि टैक्स निर्धारण नियमों के अनुसार किया गया है और बकाया वसूली के लिए प्रक्रिया जारी है। इस संबंध में नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, मामला High Court of Chhattisgarh में लंबित होने के कारण फिलहाल सख्त वसूली कार्रवाई पर कानूनी सीमाएं बनी हुई हैं। निगम आयुक्त Ashutosh Pandey ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई की जा रही है और नियमों के तहत जो संभव होगा, वह किया जाएगा।

2017-18 से शुरू हुआ था विवाद

यह विवाद नया नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत वर्ष 2017-18 से मानी जा रही है, जब पहली बार बड़े स्तर पर टैक्स डिमांड सामने आई थी। इसके बाद कंपनी द्वारा इसे चुनौती दी गई और मामला न्यायालय पहुंच गया। वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने भवन की ऊंचाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की थी, लेकिन इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया।

इस पूरे मामले में अब एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आम नागरिक पर थोड़ी सी राशि बकाया होने पर तुरंत कार्रवाई होती है, तो इतने बड़े मामलों में वर्षों तक देरी क्यों होती है। वहीं, निगम की आय पर भी इसका असर पड़ रहा है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि की वसूली अटकी होने से शहर के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

क्या विवाद किसी निष्कर्ष तक पहुंचेगा?

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन यह विवाद अब सिस्टम की पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन की कसौटी बन चुका है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में इस पर क्या निर्णायक स्थिति सामने आती है और क्या यह विवाद किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंच पाता है।

इन्हें भी पढ़ें:


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism & Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..