शह मात The Big Debate | Photo Credit: IBC24
शह मात The Big Debate: रायपुर: होली के बाद जब बजट सत्र का दूसरा दौर शुरू होते ही विपक्षी कांग्रेस ने सदन में बस्तर के धान खरीदी प्रक्रिया में- 40 से 50 हजार किसानों के धान ना बेच पाने पर सवाल पूछा। जवाब में मंत्री जी ने बताया कि इस बार सरकार ने चौकस व्यवस्था के साथ किसानों को भरपूर मौका, यहां तक की खरीदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2 दिन का एक्सट्रा टाइम भी दिया (शह मात The Big Debate) लेकिन फिर भी बस्तर में 40 हजार से ज्यादा किसान अपना धान बेचने नहीं आए। वैसे सरकार का तर्क है कि, ये हर साल होता है, कांग्रेस शासनकाल में भी कभी भी सौ-फीसदी रजिस्टर्ड किसान अपना धान नहीं बेचते थे। सवाल ये कि जब सरकार साल-दर-साल इतनी बेहतर व्यवस्था के दावे करती है तब भी हजारों किसान धान बेचने से वंचित क्यों रह जाते हैं?
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने सदन में धान खरीदी पर भारी हंगामें के साथ सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने पूछा, बस्तर के 5 जिलों में 32 हजार 200 किसानों का धान नहीं बिका जबकि उन किसानों ने पंजीयन कराया, गिरदावरी भी हुई ऐसे में वो किसान जो कर्ज ले रखे हैं, किसी की बेटी की शादी है। (शह मात The Big Debate) किसानों को उनके हक का 206 करोड़ रुपए दिया जाए। सवाल पर जवाब दिया मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि पिछले कार्यकाल से दोगुना, तिगुना धान खरीदा गया,जो किसान धान बेचने नहीं आए, दो दिन बढ़ाने पर भी धान ना बेच पाए उनके लिए क्या किया जाए? जवाब में लखमा ने फिर पूछा कि 2 दिन में सरकार ने कितना धान लिया उसका आंकड़ा बताएं। नेता विपक्ष डॉ महंत ने आरोप लगाया कि सदन में एक भी मंत्री सही जानकारी नहीं दे पार रहे हैं।
शह मात The Big Debate: धान खरीदी पर सरकार को चौतरफा घेरने के साथ-साथ विपक्षी विधायकों ने तय किया है कि, वो मंगलवार को धान के मुद्दे पर स्थगन लाएगी। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री दावा करते हैं कि धान खरीदी प्रक्रिया नियम के मुताबिक हुई है। कांग्रेस को सरकार की धान ख़रीदी से, किसानों को एकमुश्त राशि दिए जाने से, ज्यादा धान खरीदे जाने से, (शह मात The Big Debate) रिकॉर्ड समय पर भुगतान से जलन हो रही है। खाद्य मंत्री ने दावा किया कि ऐसा नहीं हुआ कि प्रदेश के शत-प्रतिशत पंजीकृत किसानों ने धान बेचा हो। जब कांग्रेस सरकार थी तब भी 2021-22 में 68% और 2022-23 में 74% किसानों ने धान बेचा था। सवाल ये कि क्या विपक्ष केवल धान खरीदी पर मुद्दा बनाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है। सवाल ये भी कि इतनी चौकस व्यवस्था होने के बाद भी इतनी संख्या में रजिस्टर्ड किसान धान क्यों नहीं बेच पाए?
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