शह मात The Big Debate: टोकन के लिए हाहाकार, खुदकुशी, हंगामा और गुहार! धान न बेच पाने वालों की मुसीबत, आखिर किसानों को क्यों हो रही इतनी परेशानी?

Paddy Purchased Through Offline Tokens in CG

शह मात The Big Debate: टोकन के लिए हाहाकार, खुदकुशी, हंगामा और गुहार! धान न बेच पाने वालों की मुसीबत, आखिर किसानों को क्यों हो रही इतनी परेशानी?

Paddy Purchase in CG. Image Source- IBC24

Modified Date: January 13, 2026 / 12:05 am IST
Published Date: January 12, 2026 11:54 pm IST

रायपुरः Paddy Purchase in CG प्रदेश में इस साल की धान खरीदी प्रक्रिया शुरू से ही किसानों के लिए कुछ नए प्रयोगों को लेकर नई व्यवस्था की चुनौतियां लेकर आई। किसानों ने प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराया, 3 टोकन व्यवस्था के तहत कई-कई किसानों का कम से कम एक टोकन अभी बचा हुआ है लेकिन अब टोकन मिलना बंद हो चुके हैं, पहला सवाल तो यही है 31 तरीख तक समय है तो अभी से टोकन बंद क्यों हुए? दूसरा अब भी दावा है कि तय रकबे का पूरा-पूरा धान लिया जाएगा तो फिर अब बचा धान कैसे बेचा जाएगा?

Paddy Purchase in CG छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी, 31 जनवरी होनी है लेकिन फिलहाल, प्रदेश के तकरीबन हर जिले में ऑनलाइन टोकन बंद हो चुके हैं। पूछने पर खाद्य विभाग के MD जितेंद्र शुक्ला ने दावा किया कि शेष किसान ऑफलाइन टोकन कटा कर धान बेच सकते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि जब किसान टोकन के लिए समितियों के पास पहुंच रहे हैं तो वहां भी केंद्र का लक्ष्य पूरा हो गया कहकर ऑफलाइन टोकन बंद करने का जवाब मिला। जाहिर है रायपुर समेत कई जिलों की समितियों में अब किसान खुलकर नाराजगी जताने लगे हैं। कोरबा के हरदीबााजर थाना क्षेत्र में, कोरबी गांव के किसान ने टोकन नाम मिलने से परेशान होकर किसान ने कीटनाशक पी लिया।

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जाहिर है कि खरीदी का समय बचा होने के बावजूद टोकन बंद होने से परेशान किसानों को लेकर विपक्ष सरकार पर सीधे-सीधे किसानों से धोखा करने का आरोप लगाकर हमलवार है तो सत्ता पक्ष का दावा है कि हर किसान का पूरा धान खरीदना सरकार का संकल्प है। दावा- आरोप-सफाई की सियासी खींचतान अपनी जगह है लेकिन किसान वाकई ठगा से महसूस कर रहा कि 31 जनवरी तक का समय होने के बाद भी धान बेचने के लिए टोकन कटने बंद हो चुके हैं। सवाल ये है कि जब सरकार का दावा है कि वो रजिस्टर्ड किसानों का, 3 टोकन के जरिए, तय रकबे का पूरा धान खऱीदेगा तो फिर किसानों को बचे टोकन ना रोक देने पर वो कैसे धान बेच सकेगा?

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।