पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एक दिन भारत का हिस्सा बनेंगे, धैर्य रखें: रामदेव

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एक दिन भारत का हिस्सा बनेंगे, धैर्य रखें: रामदेव

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एक दिन भारत का हिस्सा बनेंगे, धैर्य रखें: रामदेव
Modified Date: August 17, 2026 / 05:22 pm IST
Published Date: August 17, 2026 5:22 pm IST

रायपुर, 17 अगस्त (भाषा) योग गुरु रामदेव ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान एक दिन फिर से भारत का हिस्सा बन जाएंगे और लोगों से धैर्य रखने की अपील की।

योग गुरु रामदेव ने रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि देश में हिंदू धर्म, इस्लाम या ईसाई धर्म को कोई खतरा नहीं है, बल्कि भारत का सम्मान और गरिमा दांव पर है।

पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं को ‘अत्याचार और अन्याय’ का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं द्वारा सहे गए अत्याचार और अन्याय मानव सभ्यता की सबसे बड़ी क्रूरताओं में से हैं।’

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए। रामदेव ने कहा, ‘वह दिन भी आएगा जब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान फिर से भारत में मिल जाएंगे। बस थोड़ा धैर्य रखें।’

धर्मांतरण और इसे रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में बनाए गए कानून के मुद्दे पर रामदेव ने कहा कि हिंदुओं, ईसाइयों या मुसलमानों के उत्पीड़न के आरोप ‘राजनीतिक बयानबाजी’ का हिस्सा हैं और वह इसमें शामिल नहीं होना चाहते।

उन्होंने कहा, ‘देश में जो भी धार्मिक बदलाव हुए हैं, कम से कम यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी को प्रताड़ित न किया जाए। हिंदू धर्म, इस्लाम या ईसाई धर्म को कोई खतरा नहीं है। खतरा भारत के सम्मान और गरिमा को है।’

रामदेव ने कहा कि उनका सपना भारत को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र और इसके नागरिकों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नागरिकों के रूप में देखना है।

उन्होंने कहा, ‘मैं चाहता हूँ कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे अच्छी बने, रुपये का मूल्य कम से कम डॉलर और पाउंड के बराबर हो और भारतीय पासपोर्ट इतना मजबूत हो कि भारतीयों को दुनिया में कहीं भी वीजा की आवश्यकता न पड़े।’

उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन और रूस सहित हर देश में भारत का समान सम्मान होना चाहिए। सनातन धर्म पर रामदेव ने कहा कि धर्म में ऐसी कोई कमी नहीं है जिसके कारण लोगों को इस्लाम या ईसाई धर्म में धर्मांतरण करने की आवश्यकता पड़े।

उन्होंने कहा, ‘सनातन संस्कृति और धर्म बहुत पुराने हैं। इनमें ऐसी क्या कमी या खामी है जो हमें मुस्लिम या ईसाई बनने के लिए मजबूर करे? कुछ मुसलमानों ने तलवार, लालच, चमत्कार और गलतफहमियां फैलाकर हमारे सनातनी हिंदू भाइयों का इस्लाम में धर्म-परिवर्तन कराया। तब भी हम चुप रहे। जब ईसाइयों ने लोगों का ईसाई धर्म में परिवर्तन कराया, तब भी हम चुप रहे।’

रामदेव ने कहा, ‘सनातन धर्म में कोई अंतर्निहित दोष नहीं है, भले ही उस पर सामाजिक ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत के झूठे आरोप लगाए जाते रहे हों। इस धर्म के भीतर ही कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी सोच विकृत है और जो इस तरह का भेदभाव और सामाजिक ऊंच-नीच को बढ़ावा देते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘सनातनी होने का मतलब है भगवान राम की गरिमा, भगवान कृष्ण का योग और कर्म, और भगवान शिव से जुड़ी पवित्रता और सच्चाई को अपनाना। अगर इन मूल्यों का पालन किया जाए, तो धर्म-परिवर्तन का सवाल ही नहीं उठेगा।’

योग गुरु रामदेव ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाएं ठीक से और बिना किसी साजिश या गड़बड़ी के काम करें, यह सुनिश्चित करने में सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि सरकारी तंत्र की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। सरकारी मशीनरी को धार्मिक व्यवस्था के कामकाज में इस तरह मदद करनी चाहिए कि उसके खिलाफ कोई साजिश न रची जा सके।’

रामदेव ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि धर्म, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अर्थव्यवस्था और कृषि की व्यवस्थाओं में कोई गड़बड़ी न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का असली मतलब यही है और मुख्य ध्यान इन व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर होना चाहिए, तभी हम 2047 तक एक विकसित भारत बना पाएंगे।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता महबूबा मुफ्ती के कथित बयान कि वह एक ‘दिमागी नक्सली’ हैं, पर रामदेव ने कहा कि ऐसे बयान देश में ‘बौद्धिक अराजकता’ फैलाने के बराबर हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं राजनीतिक बयानों में नहीं पड़ना चाहता, लेकिन बौद्धिक अराजकता अलोकतांत्रिक है।’

उन्होंने कहा कि लोगों को विरोध करने और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन ऐसी गतिविधियां लोकतांत्रिक, संवैधानिक, नैतिक और आध्यात्मिक सीमाओं के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में हर किसी को बोलने की आजादी है, लेकिन उस आजादी का इस्तेमाल देश को बर्बाद करने के लिए किसी भी तरह से नहीं किया जाना चाहिए।’

भाषा संजीव अमित

अमित


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