CG State Investigation Agency: जांच एजेंसी NIA के तर्ज पर अब SIA.. एक SP समेत 74 नए पद होंगे सृजित, होगी ऐसे मामलों की जांच..
CG State Investigation Agency
रायपुर: नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद की समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ की सरकार ने बड़ा फैसला किया हैं। सरकार ने अपने इस फैसले से जाता दिया हैं कि वह अब इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ देना चाहती हैं।
दरअसल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कल बुधवार को नया रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमें एक अहम् फैसला राज्य स्तर पर जाँच एजेंसी के गठनका भी था। सरकार अब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी यानी NIA की तर्ज पर SIA यानी राजीस जाँच एजेंसी का गठन करने जा रही हैं।
अपने फैसले में सरकार ने कहा हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य में आतंकवाद, नक्सलवाद, वामपंथी उग्रवादी जैसे विशेष मामलों, प्रकरणों में त्वरित एवं प्रभावी अनुसंधान एवं अभियोजन के लिए राज्य इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एस.आई.ए.) के गठन का निर्णय लिया गया। यह एजेंसी राष्ट्रीय इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एन.आई.ए.) के साथ समन्वय के लिए राज्य के नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। इसके लिए एक पुलिस अधीक्षक सहित कुल 74 नवीन पदों का निर्माण किया गया है।
Chhattisgarh Latest Cabinet Meeting 2024
ख़त्म हुआ MOU
मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमें एक फैसला छत्तीसगढ़ सरकार और टाटा टेक्नोलाजीस के बीच हुए एक एमओयू को लेकर भी था।
मंत्रिपरिषद की बैठक में निर्णय लेते हुए सरकार ने पूर्ववर्ती भूपेश सरकार की तरफ से किये गए इस समझौते को ख़त्म करने का निर्णय लिया हैं। (CG Govt-TATA MOU) सरकार की तरफ से कहा गया हैं कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था उन्नयन योजना के संबंध में टाटा टेक्नालाॅजी के साथ हुए अनुबंध को राज्य के हित में नहीं पाए जाने की स्थिति में अनुबंध को समाप्त करने का फैसला लिया हैं। इसके साथ ही एस्क्रो अकाउंट में जमा राशि 185.80 करोड़ को राज्य की कोष में जमा कराने का फैसला सरकार ने लिया हैं।
क्या था MOU
दरअसल पूर्ववर्ती भूपेश बघेल की सरकार में तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास विभाग और टाटा टेक्नोलाजीस के बीच एक अनुबंध किया गया था। इसके अनुसार सरकारी आइटीआइ संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 1188.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इस राशि से इन संस्थानों में आधुनिक मशीने उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। तत्कालीन सरकार का दावा था कि 36 आईटीआई के प्रशिक्षकों को छह नए ट्रेडों और 23 शार्ट टर्म कोर्स में प्रशिक्षण दिया जाएगा। टाटा टेक्नोलाजीस द्वारा इन संस्थानों में अत्याधुनिक तकनीकी वर्कशाप की स्थापना, प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। युवाओं को बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट दिलाने में टाटा और उनकी सहयोगी कंपनी सहयोग करेंगी।
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इन ITI का होना था उन्नयन
टाटा टेक्नोलॉजीस को प्रदेश के जिन आईटीआई को संवारने का जिम्मा दिया जाना था उनमे शासकीय आइटीआइ संस्थान बैकुंठपुर, ओड़गी वाड्रफनगर, मैनपाट, बगीचा, लोरमी, कोनी- बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, अकलतरा, हसौद, रायगढ़, खरसिया, राजनांदगांव, डोंगरगांव, मानपुर, छुईखदान, पण्डरिया, गुंडरदेही, दल्लीराजहरा, गुरूर, दुर्ग, पाटन, धरसींवा, हीरापुर, आरंग, अभनपुर, भाटापारा, सिमगा, बागबाहरा, पिथौरा, कांकेर, अंतागढ़, चारामा, नगरनार और दंतेवाड़ा शामिल थे।

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