Vishnu Ke Sushasan: सीएम विष्णुदेव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के आध्यात्म और संस्कृति को मिली खोई पहचान.. राजिम में ‘आस्था के महापर्व कुम्भ’ का ऐतिहासिक सफल आयोजन..

Chhattisagarh Rajim Kumbh Mela: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राजिम कुंभ मेला धर्म, संस्कृति और स्थानीय रोजगार के लिए प्रमुख मंच बना।

Vishnu Ke Sushasan: सीएम विष्णुदेव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के आध्यात्म और संस्कृति को मिली खोई पहचान.. राजिम में ‘आस्था के महापर्व कुम्भ’ का ऐतिहासिक सफल आयोजन..

Chhattisagarh Rajim Kumbh Mela || Image- IBC24 News File

Modified Date: March 24, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: March 24, 2026 4:54 pm IST
HIGHLIGHTS
  • राजिम कुंभ मेला वैश्विक स्तर पर स्थापित
  • स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा
  • धर्म, संस्कृति और सामाजिक योजनाओं का संगम

रायपुरः छत्तीसगढ़ को धर्म और संस्कृति की धरा के रूप में पहचान मिली है। आदिम काल से ही छत्तीसगढ़ का इतिहास सनातन संस्कृति से जुड़ा रहा है। भगवान श्रीराम के ननिहाल के साथ ही यहाँ बहने वाली पवित्र नदियों के किनारे आज भी छत्तीसगढ़ की पहचान सजीव है। (Chhattisagarh Rajim Kumbh Mela) छत्तीसगढ़ का बस्तर हो या सरगुजा, जांजगीर हो या न्यायधानी बिलासपुर। प्रदेश के हर क्षेत्र का संबंध सनातन संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी हुई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदा सरकार प्रदेश के इस समृद्ध संस्कृति और पहचान को सतत आगे बढ़ाने के लिए संकल्पशील है, प्रयत्नशील है। छत्तीसगढ़ में धर्म और आध्यात्म्का सबसे बड़ा संगम राजिम में देखें को मिल रहा है।

सीएम के प्रयासों से राजिम को वैश्विक पटल पर स्थापित

Vishnu Ka Sushasan: उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहे राजिम कुंभ को लंबे समय से प्रदेश के ‘आस्था महापर्व’ के रूप में देखा जाता रहा है। त्रिवेणी संगम पर आयोजित यह आयोजन केवल स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि संत-समागम, आध्यात्मिक प्रवचन और लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी प्रमुख मंच रहा है, लेकिन पिछली सरकार के कार्यकाल में इस आयोजन की पारंपरिक भव्यता और गरिमा में कमी आई। कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों की वजह से संत-समाज की सहभागिता, व्यवस्थाओं की व्यापकता और प्रचार-प्रसार के स्तर को लेकर भी सवाल उठे। कई लोगों का मानना था कि जिस स्तर की राष्ट्रीय पहचान राजिम कुंभ को पहले प्राप्त थी, वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ गई थी, लेकिन प्रदेश में साय सरकार के आने के बाद इसमें काम शुरू हुआ और एक बार फिर कुंभ के तर्ज पर मेले का आयोजन कर राजिम को वैश्विक पटल पर स्थापित किया।

स्थानीय रोजगार सृजन का बड़ा मंच बना राजिम कुम्भ

सरकार ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, सुरक्षा और आवास सुविधाओं में सुधार पर जोर दिया। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई, बल्कि स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला। राजिम कुंभ (कल्प) इस बार केवल धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और स्थानीय रोजगार सृजन का भी बड़ा मंच बना। (Chhattisagarh Rajim Kumbh Mela) आयोजन स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई। पात्र हितग्राहियों को मौके पर पंजीयन, मार्गदर्शन और आवेदन संबंधी सहायता भी प्रदान की गई। सरकारी प्रतिनिधियों ने कृषि, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाई। इससे दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आए लोगों को सीधे लाभ मिला।

प्रदेश के धर्म-संस्कृति को मिली नई पहचान

राजिम कुंभ (कल्प) के आयोजन से स्थानीय स्तर पर व्यापक आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं। अस्थायी दुकानों और भोजनालयों के माध्यम से व्यापारियों को आय का अवसर मिला। स्व-सहायता समूहों (SHG) और महिला समूहों को अपने उत्पाद बेचने का मंच मिला। परिवहन, टेंट, लाइटिंग, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी संख्या में लोगों को अस्थायी रोजगार मिला। स्थानीय हस्तशिल्प और लोक कला से जुड़े कलाकारों को भी प्रस्तुति का अवसर मिला, जिससे सांस्कृतिक पहचान के साथ आय का स्रोत भी सशक्त हुआ। कुल मिलाकर राजिम कुंभ (कल्प) ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और आर्थिक गतिविधियों का भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

इन्हें भी पढ़ें:-

महाराष्ट्र सरकार ने वंतारा से तेंदुओं को रखने का अनुरोध किया था, 25 को पहले भेजा जा चुका है: मंत्री

उप्र : दिव्यांग महिला के साथ दुष्कर्म करने के दोषी को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

दैवी शक्तियों के नाम पर और सत्ता में बैठे लोगों के संरक्षण में महिलाओं के साथ होने वाला दुर्व्यवहार एक गंभीर मुद्दा : राज

राम विलास पासवान के पूर्व निजी सचिव पर एक करोड़ रुपये रिश्वत लेने का मामला दर्ज

एसआईआर : निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की पूरक मतदाता सूची जारी की

जम्मू कश्मीर के रियासी में खाई में गिरी कार, भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown