Chhattisgarh Government Bans Husband Son : महिला जनप्रतिनिधि खुद संभालेगी अपना काम, पति, पिता और पुत्र को लेकर साय सरकार ने लिया बड़ा फैसला, यहां जाने क्या है नया आदेश

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छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन और अन्य करीबी रिश्तेदारों को उनका प्रतिनिधि या समन्वयक नियुक्त करने पर रोक लगा दी है। नए नियम के लागू होने के बाद महिला जनप्रतिनिधियों को अपने प्रशासनिक और जनसेवा से जुड़े दायित्व खुद निभाने होंगे।

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 07:58 PM IST

Chhattisgarh Government Bans Husband Son / Image Source : FILE

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने 'छत्तीसगढ़ नगरपालिका नियम, 2022' में संशोधन किया है।
  • महिला जनप्रतिनिधियों के पति, बच्चों, भाई-बहन और अन्य करीबी रिश्तेदारों को प्रतिनिधि बनाने पर रोक लगाई गई है।
  • नियम राजपत्र में प्रकाशन के साथ प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है।

रायपुर : Chhattisgarh Government Bans Husband Son :  छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों या रिश्तेदारों को उनका प्रतिनिधि या समन्वयक नियुक्त करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ‘छत्तीसगढ़ नगरपालिक नियम, 2022’ में संशोधन करते हुए इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधियों के रूप में नाम-निर्देशन पर रोक

छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित नवीन संशोधन के अनुसार, अब किसी भी नगरीय निकाय नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायत में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य और नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि के रूप में नामांकित या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है नियम

अक्सर देखा जाता था कि महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिवार के पुरुष सदस्य (जैसे पति या पुत्र) बैठकों और प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते थे। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नया प्रतिबंध प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना

राज्य सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी और उनकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करना है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वयं अपने प्रशासनिक और जनसेवा से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करना होगा, जिससे निकायों में ‘पति-प्रतिनिधि’ प्रथा पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

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