CG Dharma Swatantrya Act: कांग्रेस बोली, “उम्मीद है धर्म स्वातंत्र्य कानून का दुरूपयोग नहीं होगा”.. राज्यपाल से पूछा, ‘आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर रहे?’..
Congress on Chhattisgarh Dharma Swatantrya Act 2026: असम पुलिस ने पवन खेड़ा के घर छापा मारा, हिमंता सरमा ने फर्जी दस्तावेज़ आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
Congress on Chhattisgarh Dharma Swatantrya Act 2026 || Image- symbolic file
- छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कानून लागू
- जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा
- कांग्रेस ने दुरुपयोग पर जताई चिंता
रायपुर: धर्मांतरण से जुड़े मामलों को नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक अब कानून बन गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं, जिसके बाद यह औपचारिक रूप से लागू हो गया है। (Congress on Chhattisgarh Dharma Swatantrya Act 2026) अब बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने पर दोषियों को 7 से 10 साल तक की जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपए जुर्माना देना होगा।
कांग्रेस को उम्मीद, नहीं होगा कानून का दुरूपयोग
वही इस बिल के कानून बनने और राज्यपाल के हस्ताक्षर पर कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीसीसी प्रमुख दीपक बैज ने कहा कि, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिया है हम उम्मीद करते हैं कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। दीपक बैज ने आगे कहा कि, हम राज्यपाल से जानना चाहते हैं कि आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर रहे है? इसका क्या कारण है? साढ़े तीन साल से अधिक समय गुजर चुका है ये अभी भी पेंडिंग सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?
बैज ने कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। सरकार मामले भी दर्ज तक नहीं कर रही है। ऐसा करके सरकार कम अपराध के आंकड़े दिखाना चाहती हैं। आज आम आदमी एफआईआर के लिए भटक रहा है।
क्या है छग धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026?
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 एक प्रस्तावित कानून है। (Congress on Chhattisgarh Dharma Swatantrya Act 2026) इसका उद्देश्य राज्य में जबरन या अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। इस विधेयक को राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी और आज इसे विधानसभा में पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लाया जा रहा है।
संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध
विधेयक के मुख्य नियम और दंड के तहत अवैध धर्मांतरण को बल, प्रलोभन, दबाव, कपट और डिजिटल माध्यम से परिभाषित किया गया है। विधेयक स्पष्ट करता है कि अपने पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। इस प्रकार का अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, जिसकी सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
क्या है विधेयक में सजा का प्रावधान?
अवैध धर्मांतरण के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान इस प्रकार है: (Congress on Chhattisgarh Dharma Swatantrya Act 2026) सामान्य अवैध धर्मांतरण के लिए 7 से 10 वर्ष की जेल और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माने का प्रावधान है।
अनुसूचित वर्ग के खिलाफ अपराध में दंड के प्रावधान
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC के प्रति किए गए अपराध में 10 से 20 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माना तथा सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 10 वर्ष से अधिक आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माना शामिल है।
सूचना संबंधी नियम क्या है?
स्वैच्छिक धर्मांतरण की प्रक्रिया में व्यक्ति द्वारा सूचना देना, जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना और 30 दिनों तक सार्वजनिक सूचना देना शामिल है।
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