India International Rice Summit 2026: 9 जनवरी को राजधानी में क्या होने वाला है? 11 देशों के खरीदार और हजारों करोड़ का व्यापार… यहाँ पढ़ें पूरी डिटेल्स

पहले संस्करण की ऐतिहासिक सफलता के बाद इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) 2026 का आयोजन 9–10 जनवरी को रायपुर में किया जाएगा। यह समिट भारत के वैश्विक चावल व्यापार नेतृत्व को सुदृढ़ करने और छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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  • Publish Date - January 2, 2026 / 10:51 AM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 01:04 PM IST
HIGHLIGHTS
  • IIRS 2026 में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, राजनयिकों और उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
  • समिट में नॉन-बासमती, पारंपरिक GI-टैग्ड किस्मों और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
  • 40+ प्रदर्शकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी, 30 से अधिक विशेषज्ञ सत्र और संरचित B2B बैठकों के माध्यम से व्यापारिक अवसर सृजित होंगे।

India International Rice Summit 2026: रायपुर : पहले संस्करण की ऐतिहासिक सफलता के बाद, इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) 2026 का द्वितीय संस्करण 9–10 जनवरी 2026 को मैरा रिसॉर्ट एवं कन्वेंशन सेंटर, रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित किया जाएगा। इस समिट का आयोजन द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (TREACG) द्वारा किया जा रहा है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (MoC), APEDA, FICCI, CII, TPCI एवं AIREA का सहयोग प्राप्त है।

जनवरी 2025 में आयोजित IIRS 2025 ने चावल निर्यात से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों—निर्यातक, मिलर्स, खरीदार, नीति-निर्माता एवं सेवा प्रदाता—को एक वैश्विक मंच पर सफलतापूर्वक जोड़ा। यह आयोजन पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

India International Rice Summit 2026: IIRS 2025 में 11 देशों के खरीदार, 21 प्रदर्शक, CEO राउंड टेबल, 25 से अधिक विशेषज्ञ सत्र, पैनल चर्चाएँ, तकनीकी प्रस्तुतियाँ तथा नेटवर्किंग फोरम आयोजित किए गए। लगभग 500 हितधारकों की सहभागिता के साथ यह समिट वैश्विक चावल व्यापार के लिए एक प्रभावशाली मंच के रूप में उभरा।

इस मजबूत आधार पर IIRS 2026 का आयोजन और अधिक व्यापक स्वरूप में किया जा रहा है। पश्चिम अफ्रीका, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC), दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य पूर्व जैसे प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों से राजनयिकों एवं चावल आयातकों को आमंत्रित किया गया है। समिट का प्रमुख फोकस नॉन-बासमती चावल, GI-टैग्ड पारंपरिक किस्मों तथा फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) के निर्यात को बढ़ावा देना होगा, साथ ही B2B बैठकों के माध्यम से खरीदार-विक्रेता संवाद को सशक्त किया जाएगा।

India International Rice Summit 2026: भारत आज विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक एवं निर्यातक देश है, जो वैश्विक चावल व्यापार का लगभग 40%–45% हिस्सा रखता है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण योगदान है, जहाँ से भारत के कुल चावल निर्यात का लगभग 15% विभिन्न भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से होता है। राज्य से प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया जाता है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹9,000–10,000 करोड़ है।

IIRS 2026 में लगभग 500 हितधारकों की सहभागिता अपेक्षित है, जिनमें निर्यातक, आयातक, राजनयिक, नीति-निर्माता, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यक्रम में 30 से अधिक विशेषज्ञ सत्र, चावल मूल्य शृंखला से जुड़े 40+ प्रदर्शकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी तथा लक्षित वैश्विक खरीदार सहभागिता होगी।

India International Rice Summit 2026: यह समिट वैश्विक चावल क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और सुदृढ़ करने तथा छत्तीसगढ़ को गुणवत्ता, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। IIRS 2026 को दीर्घकालिक साझेदारियों, नए बाजार अवसरों और सतत विकास के उत्प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है।

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इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) 2026 कब और कहाँ आयोजित होगी?

IIRS 2026 का आयोजन 9–10 जनवरी 2026 को मैरा रिसॉर्ट एवं कन्वेंशन सेंटर, रायपुर (छत्तीसगढ़) में किया जाएगा।

IIRS 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

समिट का उद्देश्य भारतीय चावल निर्यात को बढ़ावा देना, वैश्विक खरीदारों से सीधे संवाद स्थापित करना और छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार के केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

IIRS 2026 में कौन-कौन भाग ले सकता है?

इसमें चावल निर्यातक, आयातक, मिलर्स, नीति-निर्माता, राजनयिक, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और कृषि-खाद्य उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले सकते हैं।