Uniform Civil Code Kya Hai: छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगी UCC, CM साय ने बताई पूरी तैयारी, जानिए क्या है समान नागरिक संहिता?
Uniform Civil Code Kya Hai: छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगी UCC, CM साय ने बताई पूरी तैयारी, जानिए क्या है समान नागरिक संहिता?
Uniform Civil Code Kya Hai | Photo Credit: AI
- UCC कमेटी गठन
- मानसून सत्र तक रिपोर्ट तैयार होगी
- विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने में एकरूपता
रायपुर: Uniform Civil Code Kya Hai छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर साय सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में UCC लागू करना है। (UCC in Chhattisgarh) इसके लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया गया है। इसका काम मानसून सत्र तक पूरा हो जाएगा। सरकार का कहना है कि UCC लागू करने को लेकर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं तय समय में पूरी की जाएंगी।
सरकार इसे क्यों लागू करने जा रही है?
Chhattisgarh UCC Update दरअसल, छत्तीसगढ़ में वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है। ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए Uniform Civil Code लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड? (Chhattisgarh UCC Update)
विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति में सभी के लिए एक नियम।
परिवार के सदस्यों के आपसी संबंध और अधिकारों में समानता।
जाति, धर्म या परंपरा के आधार पर नियमों में कोई रियायत नहीं।
किसी भी धर्म विशेष के लिए अलग से कोई नियम नहीं।
UCC हो लागू तो क्या होगा? (UCC implementation in Chhattisgarh)
UCC के तहत शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने जैसे मामले।
हर धर्म में शादी, तलाक के लिए एक ही कानून।
जो कानून हिंदुओं के लिए, वहीं दूसरों के लिए भी।
बिना तलाक के एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे।
शरीयत के मुताबिक जायदाद का बंटवारा नहीं होगा।
UCC लागू होने से क्या नहीं बदलेगा? (Uniform Civil Code CG)
धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं।
धार्मिक रीति-रिवाज पर असर नहीं।
ऐसा नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे।
खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर प्रभाव नहीं।
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