Water Tax in Chhattisgarh: जल संसाधन विभाग ने पानी के इस्तेमाल पर बढ़ाया शुल्क, अब 360 रुपए प्रति घन मीटर की दर से करना होगा भुगतान, जानिए साय सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला

Water Tax in Chhattisgarh: जल संसाधन विभाग ने पानी के इस्तेमाल पर बढ़ाया शुल्क, अब 360 रुपए प्रति घन मीटर की दर से करना होगा भुगतान, जानिए साय सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला

Water Tax in Chhattisgarh: जल संसाधन विभाग ने पानी के इस्तेमाल पर बढ़ाया शुल्क, अब 360 रुपए प्रति घन मीटर की दर से करना होगा भुगतान, जानिए साय सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला

Water Tax in Chhattisgarh: जल संसाधन विभाग ने पानी के इस्तेमाल पर बढ़ाया शुल्क, अब 360 रुपए प्रति घन मीटर की दर से करना होगा भुगतान / Image: IBC24 Customized

Modified Date: February 3, 2026 / 10:26 am IST
Published Date: February 3, 2026 10:26 am IST
HIGHLIGHTS
  • नई दरें 2 फरवरी 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई
  • घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं होगा
  • तीन गुना (3 times) जल कर देना होगा

रायपुर: Water Tax in Chhattisgarh छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने पानी के इस्तेमाल पर शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। पानी के नए शुल्क को लेकर जल संसाधन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिय है और पानी की नई दरें 2 फरवरी 2026 यानि कल से ही लागू कर दी गई है। बता दें कि 5 साल पहले पानी के इस्तेमाल पर लिए जाने वाले शुल्क में संशोधन किया गया था। हालांकि सरकार के इस फैसले का आम जनता को सीधा असर नहीं होगा। ये फैसला उद्योगों के लिए लिया गया है। सरकार ने पानी को संसाधन संरक्षण, राजस्व वृद्धि और भू-जल दोहन रोकने के लक्ष्य से इस नई दर संरचना को लागू किया है।

360 रुपए प्रति घन मीटर तक लगेगा शुल्क

Water Tax in Chhattisgarh मिली जानकारी के अनुसार 2 फरवरी से लागू पारी की दरें उद्योगों के साथ ही थर्मल और हाइड्रो विद्युत परियोजना पर लागू होगी। जल संसाधन विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अब उद्योगों को 300 से 360 रुपए प्रति घन मीटर शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं, अगर प्लांट में पानी का खुद का स्त्रोत यानि बोर है तो 150 रुपए प्रति घन मीटर की दर से शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही लघु जल विद्युत परियोजना पर भी शुल्क बढ़ाया गया है, ऐसे उद्योगों को 7.50 से लेकर ₹15 प्रति घन मीटर चार्ज लगेगा।

10 वर्ष तक एकमुश्त जल कर भुगतान पर होगा मुनाफा

नई नीति में कहा गया है कि जो उद्योग 5 से 10 वर्ष तक का जल-कर एकमुश्त जमा कर देंगे, उनके लिए उस अवधि तक जल-दरें स्थायी रहेंगी, भले ही भविष्य में दरें बढ़ जाएं। जिन उद्योगों ने जलाशय निर्माण के लिए अग्रिम जल-कर अंशदान नहीं दिया है, उन्हें अनुबंध से पहले 1 करोड़ करोड़ रुपए प्रति मिलियन घनमीटर की दर से एकमुश्त सुगमता शुल्क देना होगा, जो न समायोज्य होगा और न ही वापसी योग्य। इसी तरह भू-जल उपयोग अब नए भू-जल प्रबंधन नियमों के तहत होगा। जहां सतही जल उपलब्ध है, वहां औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-जल अनुमति का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

ऐसे में लगेगा तीन गुना जल कर

राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन उद्योगों ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) नहीं लगाया है या उसे पूरी क्षमता से संचालित नहीं कर रहे, उनसे लागू दर का तीन गुना जल-कर वसूला जाएगा। रीसाइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को अपने उपचारित जल का उपयोग अपने ही संयंत्र में करने की अनुमति है, लेकिन यदि उसे बाहर उपयोग या सप्लाई करना हो तो विभाग की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

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