महंगा फोन, सस्ता पानी..कब रुकेगी ये मनमानी? छत्तीसगढ़ में अफसर क्या खुद को भगवान समझने लगे हैं?

महंगा फोन, सस्ता पानी..कब रुकेगी ये मनमानी? Rescue operation up to four days for one phone, Read full News

महंगा फोन, सस्ता पानी..कब रुकेगी ये मनमानी? छत्तीसगढ़ में अफसर क्या खुद को भगवान समझने लगे हैं?

Rescue operation for phone

Modified Date: May 27, 2023 / 12:13 am IST
Published Date: May 27, 2023 12:13 am IST

अमित वर्मा/अमिताभ भट्टाचार्य, कांकेरः Rescue operation for phone अब तक लोगों की जान बचाने के लिए कई ऑपरेशन आपने देखे होंगे पर पखांजूर के परलकोट जलाशय में एक फोन के लिए चार दिन तक ऑपरेशन चलते पहली बार देखा गया। जो अब चर्चा का विषय बना हुआ । फोन को पानी से निकालने के लिए सोमवार से ऑपरेशन “सर्च मोबाइल” शुरू किया गया, जो गुरूवार को फोन निकाल कर ही समाप्त किया गया। इस दौरान लगभग 21 लाख लीटर पानी बर्बाद किया गया। ये मामला बानगी है कि अफसर खुद को भगवान समझ बैठे हैं और पब्लिक परेशान है।

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Rescue operation for phone छत्तीसगढ़ में नियम कायदे सब जनता के लिए हैं और अफसर खुद को भगवान मान बैठे हैं। व्यवस्था के ऊपर जाकर मनमानी कर रहे हैं। इसकी बानगी पखांजूर की एक घटना में देखने को मिली।
दरअसल बीते रविवार फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास अपने दोस्तों के साथ परलकोट जलाशय घूमने पहुंचे। यहीं पर राजेश का फोन जलाशय में गिर गया। एक तो डेढ़ लाख का फोन ऊपर से उसका मालिक फूड इंस्पेक्टर। आनन फानन में मिशन मोबाइल सर्च शुरू हुआ। गोताखोर बुलाए गए लेकिन वो फोन को खोज नहीं पाए। तमतमाए फूड इंस्पेक्टर ने जलाशय के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। पानी निकालने के लिए 30 हॉर्स पॉवर का पंप मंगवाया गया। फूड इंस्पेक्टर का फोन खोजने के लिए दिन रात मुहिम चली।

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फोन की तलाश तो सफल हो गई लेकिन फसलों को पानी देने के लिए डैम में जमा 21 लाख लीटर पानी बहा दिया गया। IBC24 पर खबर दिखाए जाने के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर निशाना साधा। फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास पहले भी अपने कारनामों की वजह से विवादों में रहा है। राशन कार्ड के चावल में गड़बड़ी के मामले में सस्पेंड भी हो चुका है। बवाल मचा तो राशन के बाद अब पानी की बर्बादी उसके सस्पेंड होने की वजह बन गई।

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मामला तूल पकड़ने के बाद आरोपी फूड इंस्पेक्टर अब सफाई दे रहा है। फोन गुम होने पर जलाशय खाली करा देने वाला ये फूड इंस्पेक्टर प्रशासनिक तंत्र में फैली सड़ांध का एक नमूना है। जिसने खुद को भगवान समझ लिया। सोचिए उन किसानों के बारे में जिनकी फसल को पानी मिलना चाहिए था। वो इसकी सनक का खामियाजा भुगतेंगे।

 


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।