शह मात The Big Debate: ‘पक्ष’ के विपक्ष.. आखिर क्या है लक्ष्य? क्या सरकार के सामने प्रेशर ग्रुप की तरह काम कर रहे सीनियर्स?
'पक्ष' के विपक्ष.. आखिर क्या है लक्ष्य? क्या सरकार के सामने प्रेशर ग्रुप की तरह काम कर रहे सीनियर्स? Ruling Party Leaders in Role of Opposition
CG News. Image Source- IBC24
रायपुरः CG News क्या प्रदेश में विपक्ष बंटा हुआ और कमजोर है? इतना कमजोर कि खुद सत्तापक्ष के नेताओं को विपक्ष की भूमिका निभानी पड़ रही है? क्या अंदरूनी कलह, अपने पर लगे करप्शन चार्जेस और अपने नेताओं को खुश करने शक्तिप्रदर्शन में उलझी कांग्रेस सरकार को आईना नहीं दिखा पा रही है? छत्तीसगढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ये आरोप लगाया है। जब उनसे पूछा गया कि बीते 2 साल में अक्सर उनकी चिट्ठी और तेवर प्रदेश सरकार के खिलाफ क्यों होते हैं? क्या वो सरकार के खिलाफ हैं? इस पर पूर्व मंत्री ने जो जवाब दिया उससे विपक्ष खुद घिर गया है।
CG News रायपुर से मौजूदा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बीते कुछ दिनों से उनकी सरकार से नाराजगी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की। मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रायपुर के विकास को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और रायपुर के चारों विधायकों के साथ गहन मंथन किया। मीटिंग के बाद सांसद बृजमोहन ने सरकार को बार-बार पत्र लिखने और नाराजगी के सवाल पर मौन तोड़ा और कहा कि वो सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ऐसे सुझाव देते हैं। जिसपर अमल कर सरकार बेहतर काम कर सके। अग्रवाल ने विपक्ष पर करारा कटाक्ष कर कहा कि, छत्तीसगढ़ में विपक्ष बंटा हुआ और कमजोर है। विपक्ष जनहित के मुद्दे उठा नहीं पा रहा इसीलिए उन्हें ही अपनी सरकार को सही दिशा दिखाने पत्र लिखना पड़ रहा है।
इधर, कांग्रेस नेता अब भी दोहरा रहे हैं बृजमोहन अग्रवाल समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को उनकी ही सरकार पर भरोसा नहीं है।ये जगजाहिर है कि 2023 में सत्ता में आने का बाद मौजूदा सरकार से सीनियर विधायक और पूर्व मंत्री जैसे राजेश मूणत, अजय चंद्राकर, अमर अग्रवाल और बृजमोहन अग्रवाल अपनी ही सरकार से नाराज बताए जाते हैं। खुद बृजमोहन अग्रवाल बीते 2 साल में, अलग-अलग मुद्दों पर अपनी ही सरकार को 8 बार पत्र लिख चुके हैं, जिसे कांग्रेस ने सरकार के प्रति अविश्वास बताते हुए घेरा। अब खुद बृजमोहन कांग्रेस को कमोजर, बंटा हुआ विपक्ष कहकर उनकी भूमिका अपनाने की बात कह रहा है। सवाल ये है कि क्या ये विपक्ष की कमजोरी के चलते सत्ता पक्ष को नेताओं को अपनी सरकार की खामियों पर सवाल उठाना पड़ता है?
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