Shriram's entry into politics
रायपुर। Shriram’s entry into politics राम मंदिर निर्माण की तारीख के ऐलान के साथ ही एक बार फिर राजनीति में श्रीराम की एंट्री हो गई। इस ऑल टाइम हिट एजेंडे को भुनाने के लिए बयानों का सिलसिला चल पड़ा है। छत्तीसगढ़ में भी राजनीतिक दल खुद को सबसे बड़ा राम भक्त बताने में जुटे हैं।
Shriram’s entry into politics राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास। सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास॥ इस दोहे में तुलसीदास यही मांगते हैं कि मेरा एक मात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे।
राम पर यही भरोसा राजनीतिक दलों का है। राजनीति में राम की एंट्री से कई बार ध्रुवीकरण हुआ और जीत के समीकरण बदल गए। अब चुनावी साल में एक बार फिर बीजेपी राम का एजेंडा लेकर हाजिर है। त्रिपुरा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान कर दिया।
राजनीति में राम की महिमा और चुनावों में राम के समीकरण से कांग्रेस भी वाकिफ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस को बड़ा रामभक्त बताने की कोशिश की। हालांकि बीजेपी को उनकी दलील अच्छी नहीं लगी और कांग्रेस पर आस्था से खिलवाड़ का आरोप लगा दिया।
बहरहाल, ये तो साफ है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही खुद को रामभक्त बताने की होड़ में हैं और दोनों ही राम के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता किस पर भरोसा करेगी, ये तो राम ही जानें।