Teejan Bai Death News: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, जानिए कैसे गांव की बेटी बनीं दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान, पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी ये खास बातें
Teejan Bai Death News: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, जानिए कैसे गांव की बेटी बनीं दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान, पढ़िए ये खास बातें
Teejan Bai Death News/Photo Creadit: Ai
- पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रायपुर AIIMS में निधन, कला जगत में शोक
- 13 साल की उम्र में पहला मंच प्रदर्शन कर पंडवानी को नई पहचान दिलाई
- भारत सहित कई देशों में छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम लहराया, पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हुईं
रायपुर। Teejan Bai Death News: छत्तीसगढ़ से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. गायिका तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। तीजन बाई पिछले काफी समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर एम्स के आईसीयू (ICU) में पिछले 38 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी सेहत में सुधार नहीं हो सका और आज सुबह तड़के साढ़े 3 बजे एम्स के आईसीयू में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश और कला जगत में शोक की लहर है।
दुर्ग के गनियारी गाँव में हुआ था जन्म
तीजन बाई 70 वर्ष की थीं। 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग भिलाई से 14 किलोमीटर दूर गनियारी गाँव में जन्मीं डॉ. तीजन बाई (Padma Vibhushan Teejan Bai) लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था। वह छत्तीसगढ़ की पारधी अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं। अपने पाँच भाई-बहनों में सबसे बड़ी, उन्होंने अपने नाना बृजलाल परधी को छत्तीसगढ़ी लेखक सबल सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ी हिंदी में लिखित महाभारत का पाठ करते सुना और उन्हें यह तुरंत पसंद आ गया। उन्होंने जल्द ही इसका अधिकांश भाग याद कर लिया और बाद में उमेद सिंह देशमुख से अनौपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
मात्र 13 साल की उम्र में किया पहला मंच प्रदर्शन
Teejan Bai Death News 13 वर्ष की आयु में, उन्होंने (Teejan Bai Passed Away) पड़ोसी गाँव चंद्रखुरी (दुर्ग) में 10 रुपये के लिए अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया, जिसमें उन्होंने कपालिक शैली में ‘पांडवनी’ गाया। यह किसी महिला के लिए पहली बार था, क्योंकि परंपरागत रूप से महिलाएं वेदमती शैली में गाती थीं , जो बैठने की शैली है। परंपरा के विपरीत, तीजन बाई ने खड़े होकर, अपनी विशिष्ट कर्कश आवाज और अचूक जोश के साथ गाया, और उस क्षेत्र में प्रवेश किया जो तब तक पुरुषों का गढ़ था। कुछ ही समय में, वह आसपास के गांवों में प्रसिद्ध हो गई और विशेष अवसरों और त्योहारों पर प्रदर्शन करने के लिए निमंत्रणों की बाढ़ आ गई।
अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर बजाया डंका
छत्तीसगढ़ की तीजन बाई (Teejan Bai Passed Away) ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर प्रदेश की लोककला का डंका बजाया। तीजन बाई महाभारत की कथाओं को संगीतमय ढंग से प्रस्तुत करती हैं। यह कला शैली छत्तीसगढ़ , मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भी लोकप्रिय है। उन्हें 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था, इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें 2003 में पद्म भूषण, 1988 में पद्म श्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2018 में फुकुओका पुरस्कार शामिल हैं।
Teejan Bai Death News गनियारी गाँव में जन्मी तीजन बाई आदिवासी समुदाय, खासकर पारधी जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। 2024 की शुरुआत में उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। बाद में, जब सरकार ने उन्हें घर पर ही देखभाल के लिए कई पेशेवर और अन्य सुविधाएँ प्रदान कीं, तो 70 वर्षीय तीजन बाई गनियारी गाँव में अपने घर आ गईं और बिस्तर पर ही रहीं। वहीं उसके बाद अभी पिछले कई महीनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी, जिसके चलते उन्हें रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था।
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