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रायपुर: CG News साल के आखिरी दिनों में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के दो दिग्गज भूपेश और टीएस के बीच, टसल और टीस को लेकर चर्चाएं गर्मा गईं। बहस बढ़ी तो दोनों दिग्गजों ने बात संभाली और ऑल-इज-वेल का झंड़ा लहराया लेकिन ये सोशल मीडिया का दौर है। पूर्व CM के दौरे और उसके बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच का टशन साफ-साफ नजर आ गया। सबसे बड़ी बात ये कि टीएस ने भूपेश के साथ मिलकर काम करने की बात तो कही लेकिन साथ ही कलेक्टिव लीडरशिप की याद भी दिला दी।
CG News पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव की ये सफाई उस आरोप पर है, जिसमें कहा जा रहा था कि अंबिकापुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने ना तो सिंहदेव पहुंचे ना कांग्रेस जिला अध्यक्ष यानि सिंहदेव के क्षेत्र सरगुजा में पूर्व CM भूपेश की जानबूझकर अनदेखी की गई। दरअसल, बीती 30 दिसंबर,मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,सरगुजा के दौरे पर पहुंचे,जिनका स्थानीय नेता,कार्यकर्ता पदाधिकारियों ने जमकर स्वागत किया लेकिन पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव के समर्थक कांग्रेसी नेताओं ने बघेल से दूरी बना ली। हालांकि सिंहदेव-भूपेश में मनभेद की खबरें फैंली तो सभी ने सफाई में ना पहुंचने के अलग-अलग पर्सनल, पहले से तय कार्यक्रमों की लिस्ट बता दी। खुद भूपेश बघेल ने दौरे को पारिवारिक और निजी प्रवास बताकर सबकुछ ठीक होने की सफाई दी।
सिंहदेव समर्थक कांग्रेस नेताओं के पूर्व CM भूपेश के प्रवास के दौरान दूर रहने के सवाल पर खुद बाबा ने कहा कि, भूपेश के आने की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, उनके और बाकी नेताओं के पहले से तय निजी कार्यक्रम थे। साथ ही सिंहदेव ने कांग्रेस में आगे भी सामूहिक लीडरिशिप में चुनाव लड़ने की बात दोहराई।
टीएस के बयान पर सीनियर बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने कटाक्ष कर कहा कि उनका गोल-मोल बयान, उनकी महत्वाकांक्षा को साफ कर रहा हैं। साफ है कि कांग्रेस में कोई भी नेता किसी दूसरे को नेता मानने तैयार नहीं है।
साफ है कांग्रेसी दिग्गज चाहे लाख सफाई दे दें लेकिन बीते साल के आखिरी दिनों में, 2023 में सत्ता जाने के बाद पूर्व CM भूपेश के पहले अंबिकापुर दौरे के दौरान सिंहदेव समर्थक और भूपेश का स्वागत करने वाले नेताओं के बीच का फर्क साफ नजर आया। भूपेश के जाते ही, स्वागत में पहुंचने वाले नेताओं और सिंहदेव समर्थकों के बीच लोकल वॉट्सएप्प ग्रुप्स पर तल्खी भरी घटनाएं ने सब कुछ सामान्य होने की दलील की पोल खोल दी। सवाल ये कि क्या वाकई कांग्रेस में नेता, पार्टी और सरकार को लीड करने की महत्वाकांक्षा छोड़कर एक हो पाएं हैं?