छत्तीसगढ़ में बीजापुर के सुदूर गांवों में नक्सलवाद के अंत से विकास की यात्रा शुरू हुई
छत्तीसगढ़ में बीजापुर के सुदूर गांवों में नक्सलवाद के अंत से विकास की यात्रा शुरू हुई
बीजापुर, 12 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत से बीजापुर जिले के कई गांवों में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिल रहा है। नियाद नेल्लानार योजना और रोजगार गारंटी कानून के तहत किए जा रहे कार्यों से इन गांवों को पहली बार आवश्यक नागरिक बुनियादी ढांचे तक पहुंच मिल रही है। यह जानकारी रविवार को एक अधिकारी ने दी।
उन्होंने बताया कि बीजापुर जिले की 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को नियाद नेल्लानार पहल के तहत 42 सुरक्षा शिविरों के माध्यम से कवर किया गया है, जबकि रोजगार गारंटी कानून के तहत 1,744 विकास कार्य पूरे किए गए हैं, जिससे पांच लाख से अधिक व्यक्ति-दिवस का रोजगार सृजित हुआ है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘16,000 से अधिक परिवारों को रोजगार सहायता प्राप्त हुई है और अब तक 16,671 ‘जॉब कार्ड’ पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें 7,271 नए कार्ड शामिल हैं। नक्सली हिंसा से प्रभावित कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनमें 966 आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली, घायल पीड़ितों के 178 परिवार और मारे गए लोगों के 477 परिवार शामिल हैं। इन सभी को आजीविका सहायता के लिए रोजगार गारंटी कानून से जोड़ा गया है।’’
उन्होंने कहा कि रोजगार, आवास, पीने का पानी, शिक्षा और आजीविका के अवसरों जैसी बुनियादी सुविधाओं से पलायन कम हुआ है और माओवादी खतरे के दशकों बाद ग्रामीणों का शासन पर भरोसा मजबूत हुआ है।
अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नियाद नेल्लानार क्षेत्र में 2,977 लाभार्थियों को घर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 690 स्थायी घर पहले ही पूरे हो चुके हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के दूरदराज के गांवों में हुआ परिवर्तन यह दर्शाता है कि स्थायी शांति और समृद्धि तभी प्राप्त की जा सकती है] जब विकास अंतिम छोर तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में पहले कभी विकास नहीं पहुंचा था, वहां नियाद नेल्लानार और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से नयी उम्मीद और आत्मविश्वास उभरा है।
साय ने कहा, ‘‘यह बदलाव साबित करता है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी के माध्यम से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को भी रूपांतरित किया जा सकता है।’’
इस साल 31 मार्च को सरकार ने छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया। सुरक्षा बलों द्वारा घने जंगलों में चलाए गए अथक अभियान के बाद उग्रवादियों का कोई नेता या कैडर नहीं बचा, जिनमें से अधिकतर या तो मारे गए हैं या उन्होंने हथियार डाल दिए हैं।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
दिलीप

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