शह मात The Big Debate: शराब पर अटकी सियासत..प्रीमियम शॉप पर क्यों विपक्ष आहत? प्रीमियम शराब दुकानों की पैरवी करना जनता को रास आएगा? देखिए पूरी रिपोर्ट
CG News: शराब पर अटकी सियासत..प्रीमियम शॉप पर क्यों विपक्ष आहत? प्रीमियम शराब दुकानों की पैरवी करना जनता को रास आएगा? देखिए पूरी रिपोर्ट
CG News | Photo Credit: IBC24
- आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन का बयान
- “अच्छी दुकानें खुलेंगी तो शौकीन लोग जाएंगे।”
- कांग्रेस ने साधा निशाना – शराबबंदी के वादे की याद दिलाई
रायपुर: CG News 25 साल के हमारे प्रदेश में नक्सलवाद,धर्मांतरण के बाद सत्ता के गलियारे में एक बड़ा मुद्दा रहा है शराबबंदी 2018 में कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में पूर्ण शराबबंदी का वादा किया। बंपर जीत के साथ सत्ता भी मिली लेकिन शराबबंदी ना हो पाई। ऊपर से शराब सिंडिकेट के हावी होने, आबकारी घोटाले के आरोपों से कांग्रेस घिरती रही, लेकिन अब कांग्रेस के हाथ एक ऐसा मुद्दा लगा है जिससे वो 2023 में प्रदेश सत्ता में लौटी बीजेपी सरकार को शराब बंदी पर चौतरफा घेरने की कोशिश कर रही है। अब सवाल ये है कि एक तरफ तो घटिया शराब से होती लोगों की मौत, आज भी नकली होलोग्राम और शराब माफिया का नेक्सस एक्टिव होने की शिकायत है। आज ही सक्ती में शराब सेवन से 2 लोगों की मौत पर आबकारी मंत्री, लखनलाल देवांगन कलेक्टर-SP को कार्रवाई का निर्देश दे रहे हैं तो क्या प्रीमियम शराब दुकानें खोलने की वकालत जायज है?
CG News तो छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने प्रदेश में प्रीमियम शराब दुकानों को लेकर साफ-साफ कहा कि अच्छी दुकानें खुलेंगी तो शौकीन लोग अच्छे से जाएंगे…इसके अलावा मंत्रीजी ने ये भी बताया कि MP-CG बार्डर से अगर शराब छतीसगढ़ आएगी तो उसपर कार्रवाई जरूर होगी।
आबकारी मंत्रीजी के बयान को कांग्रेस ने फौरन लपका और साय सरकार पर जमकर निशाना साधा। शराबबंदी के वादे की याद दिलाते हुए तंज कसा कि, प्रदेशवासियों के लिए शराब के अलावा और भी कई बेहतर काम हैं जिनपर सरकार का ध्यान नहीं।
जाहिर है, आबकारी मंत्री का बयान, विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का मौका दे रहा है, लेकिन कांग्रेस खुद शराबबंदी का वादा नहीं निभा पाई थी और तो और कोविड काल में घरों में शराब डिलेवरी के प्रबंध कराकर वो घिरती रही है, इसके अलावा कांग्रेस शासन काल में हुए शराब घोटाले के आरोपों से कांग्रेस अब तक उबर नहीं पाई है। सवाल ये है कि क्या एक तरफ सरकार का शराब बंदी के लिए काम करने का दावा और दूसरी तरफ प्रीमियम शराब दुकानों की पैरवी करना जनता को रास आएगा?

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