छत्तीसगढ़ के अचानकमार बाघ अभयारण्य में बाघ का शव बरामद

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छत्तीसगढ़ के अचानकमार बाघ अभयारण्य में बाघ का शव बरामद

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 10:01 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 10:01 PM IST

बिलासपुर, 26 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में स्थित अचानकमार बाघ अभयारण्य में वन विभाग ने दो वर्षीय नर शावक का शव बरामद किया। वन विभाग के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मौत की वजह दूसरे बाघ के साथ लड़ाई है।

उन्होंने बताया कि रविवार को अचानकमार बाघ अभयारण्य के अंतर्गत सारसडोल क्षेत्र में वन कर्मियों ने गश्त के दौरान शावक का शव देखा तब उन्होंने इसकी सूचना अधिकारियों को दी।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक कार्यप्रणाली के अनुरूप गठित शव परीक्षण समिति की उपस्थिति में पशु चिकित्सकों के दल ने सोमवार को शव का पोस्टमार्टम किया । मृत बाघ के दांत, नाखून, पंजे सहित सभी अंग सुरक्षित अवस्था में पाये गये हैं।

उन्होंने बताया कि शव परीक्षण के दौरान शावक की गर्दन की हड्डी टूटी हुई पाई गई। साथ ही गर्दन के निचले हिस्से में अन्य नर बाघ के दांतों के स्पष्ट निशान भी पाये गये। इन तथ्यों से यह पुष्टि हुई है कि नर बाघ (उम्र लगभग दो वर्ष) की मृत्यु बाघों के आपसी द्वंद्व के कारण हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि शव बरामद होने वाली जगह पर आपसी क्षेत्रीय संघर्ष के स्पष्ट संकेत पाये गये, जैसे पौधों की टूटी हुई डालियां, बाघ के मल, खरोंच तथा बाल की उपस्थिति। इसके अतिरिक्त, मृत बाघ के पंजों के नाखूनों में बाघ के बाल भी पाये गये।

उन्होंने बताया कि बाघ के शव के अंदरूनी अंगों को लैब में जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि लड़ाई में शामिल दूसरे बाघ की पहचान कर ली गई है और कैमरा ट्रैप और फील्ड ट्रैकिंग के जरिए उस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद, अधिकारियों, पशु चिकित्सकों और कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि यह घटना प्राकृतिक बाघ आबादी में देखे जाने वाले सामान्य क्षेत्रीय व्यवहार को दर्शाती है। अचानकमार बाघ अभयारण्य में उपलब्ध अनुकूल आवास, कान्हा-बांधवगढ़ कॉरिडोर से हो रहे प्राकृतिक प्रवासन तथा स्थानीय प्रजनन सफलता के कारण बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा एवं आपसी संघर्ष की घटनाएं स्वाभाविक रूप से देखी जाती हैं।

पिछले वर्ष सितंबर में राज्य के वन विभाग ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में बाघों की आबादी तीन साल में दोगुनी हो गई है, जो 2022 में 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 में 35 हो गई है।

राज्य में चार बाघ अभयारण्य हैं इंद्रावती, उदंती-सीतानदी, अचानकमार और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला।

अधिकारियों ने तब कहा था कि अचानकमार अभयारण्य में राज्य में सबसे ज़्यादा 18 बाघ हैं।

भाषा सं संजीव शोभना

शोभना