CM Sai On Naxalism: गणतंत्र दिवस पर नक्सलियों को कड़ा संदेश! सीएम साय ने फिर दोहराया अपना संकल्प, बोले- बस दो महीने और…

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गणतंत्र दिवस पर नक्सलियों को कड़ा संदेश! सीएम साय ने फिर दोहराया अपना संकल्प, Chhattisgarh CM Sai Strong Message Naxalites

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 06:07 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 06:07 PM IST

रायपुरः CM Sai On Naxalism:  लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की सर्वोच्चता और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे प्रदेश में हर्षाेल्लास, देशभक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बार फिर नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प दोहराया।

गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम साय ने कहा कि प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में ध्वजारोहण करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे जवान नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं और गांव आबाद हो रहे हैं। पहली बार कई गांवों में स्कूल खुले हैं। इस बार 47 गांव में ध्वजारोहण हुआ है। दो महीने बाद 31 मार्च 2026 तक पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प अनुसार बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होगा और सभी गांवों में ध्वजारोहण होगा।

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सीएम साय ने प्रदेशवासियों की दी शुभकामनाएं (CM Sai On Naxalism)

CM Sai On Naxalism:  गणतंत्र दिवस के मौके पर अपने भाषण में मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का संविधान हमारी लोकतांत्रिक आस्था, समानता और सामाजिक न्याय का मजबूत आधार है। छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा, विकास और समृद्धि के लिए राज्य सरकार पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने अपने गणतंत्र दिवस संदेश में राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, नक्सल उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति, किसानों-श्रमिकों-महिलाओं के सशक्तीकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य-औद्योगिक विकास और सुशासन की विस्तार से जानकारी दी।

हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनेगा- सीएम साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को स्मरण करने का दिन भी है। उन्होंने संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि संविधान सामाजिक समरसता, समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को संविधान की आत्मा बताया और कहा कि भारतीय गणतंत्र ने ऐसा खुला समाज निर्मित किया है, जहां हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन सकता है।

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